जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    3. मेहनत

    अमर उजाला 4 अप्रैल 2007कली से बनते हैं फूल खिलते हैं फूल कांटों में अभ्यास बनती है मेहनत रहती नहीं है मेहनत बातों में खोज जिसे होती है मंजिल पा ही लेता है बिना परिश्रम किए जो ढूंढता है अपना समय नष्ट कर लेता है मेहनत से मिलता है मान मेहनत से बनती है शान…

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    9. धौलाधार का शृंगार

    दैनिक जागरण 30 मार्च 2007 आहा कैसी सुन्दर ओढ़ी बर्फीली चादर धौलाधार नेशुष्क मौसम से पाई मुक्ति धौलाधार नेनाले झरने नदियां सब फिर बहने लगे हैंताल बावडि़यां कूप जल से भरने लगे हैंधरती खेत खलिहानों को मिलने लगा है पानीरिमझिम रिमझिम बरसने लगा है पानीबर्फ से किया है फिर श्रृंगार धौलाधार नेआहा कैसी सुन्दर ओढ़ी…

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    2. सुख – शांति का रास्ता

    अमर उजाला 30 मार्च 2007जातियां होती हैं जीव जंतुओं कीमनुष्य नर नारी की नहींकरके जातिगत बंटवारा समाज कापा सकता तू सुख शांति नहींकौन सी जाति क्या है जातिइससे नहीं है तेरा कोई वास्ताहर प्राणी है रूप ईश्वर कासुख शांति का और न कोई रास्ता

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    8. गुरु का निरादर

    दैनिक जागरण 16 मार्च 2007 जब मन कर्म वाणी सेमैं गुरु का अनादर करता हूंतब मैं उनसे सुस्नेह कीसयंमी होते हैं गुरु सदाकरते हैं शिष्य हित की बातमैं शिष्य हूं मन चलाकरता हूँ अपने मन की बातमन की बातों में रम करजब मैं गुरु को भूल जाता हूंखाता हूं तब ठोकरें दरदरगुरु से दूर हो…

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    7. छात्रों की व्यथा

    दैनिक जागरण 10 मार्च 2007हमें पर्चियां पहुंचा करपरीक्षा में नकल को न करो हवाअमूल्य जीवन भ्रष्ट हो जाएगाहमारी अयोग्यता को न करो हवानकल से परीक्षा में हम चाहे पास हो जाएंगेऐसे तो हम कभी योग्य नही बन पाएंगेआगे योग्य नागरिक तुम्हें मिलेंगे कैसेयोग्य डाक्टर इंजीनियर तुम्हें मिलेंगे कैसेहमारे इन अमूल्य जीवन पलों कोनकल की तुम…

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