जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    6. जागो धरती नन्दन

    दैनिक जागरण 2 मार्च 2007 जागो धरती नन्दन हो रहा क्रंदन महान कांप रही धरती गिर न जाए आसमान पीडि़त राष्ट्र निज नेत्र खोल जरा त्रस्त मानवता रक्त रंजित हो धरा जमा और मुनाफाखोरों का लगा है मेला स्वार्थ सिद्धि का पड़ा है घेरा पल पल लाता कम्पन प्रभंजन जहान जागो धरती नन्दन हो रहा…

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    5. भूजल संरक्षण

    भूजल संरक्षण का हर जगह रखना है ध्यान पल पल इससे सबको मिलता है जीवन दान अब हमने युद्धस्तर पर करना है भूजल का संरक्षण भूजल स्तर ऊपर लाना है होगा इससे हर जीवन का संरक्षण नहीं करेंगे अब हम और अधिकधरती का चीरहरण चारों ओर हरियाली होगी होगा भूजल पुनर्भरण जल संरक्षण

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    4. कहना है क्या

    दैनिक जागरण 15 फरवरी 2007आत्म बोध प्राप्त करने कोआत्म चिन्तन करना अच्छाआत्म ज्ञान हो जाएतो कहना है क्याआत्म दर्शन करने कोआत्मावलोकन करना अच्छाआत्म साक्षात्कार हो जाएतो कहना है क्याआत्म विश्वास बढ़ाने कोकलात्मक प्रतियोगिताओं में भाग लेना अच्छाअपनी पहचान बन जाएतो कहना है क्यासंसार एक परिवार निहारने कोआध्यात्मिक दृष्टि अपना लेना अच्छाकोई सद्गुरु बन जाएतो कहना…

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    1. बोल सके तो

    अमर उजाला 13 फरवरी 2007 बोल सके तो बोल प्यारेमीठे बोल तू बोलकीमती बोल तू बोल प्यारेबोल संभल कर बोलफूल मुरझा जाते हैं अक्सरकली सदा रहती नहींघाव तलवार के भर जाते हैंमगर बात कड़वी मिटती नहीं

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    3. प्यारा वतन

    दैनिक जागरण 26 जनवरी 2007 है वही मेरा प्यारा वतनहिमालय चूमता जहां ऊंचा गगनकण कण सौरभ लाती नित नूतन पवनपुण्य जीवन पाते मिलते जनगणनित क्रांतियों के जहां होते यत्नहै वही मेरा प्यारा वतनमिलता जहां देखने विशाल पाहन सेतुउस पार पापी मारा था रक्षा मानवता हेतुहोता जहां अधर्म का प्रतिक्षण पतनहै वही मेरा प्यारा वतन

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