जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    3. स्थानीय विकास और जन सहयोग

    मातृवंदना सितम्बर 2015 सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह के प्राकृतिक एवंम सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक है l ध्यान…

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    2. छोटी – छोटी असावधानियों से भूजल स्तर जाएगा पाताल !

    मातृवंदना अगस्त 2015 पर्यावरण चेतना हमारी अनेकों समस्याएं हैं, वह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन समस्याओं में गहरा होता जा रहा भूजल का गिरता स्तर, वर्तमान में राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। हम हर क्षण राष्ट्र के अधिकांश भूजल संसाधनों का कदम-कदम पर दुरुपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप भूजल…

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    1. शोषण पर आधारित विकास सहन नहीं करती प्रकृति

    10 अगस्त 2015 पंजाब केसरी पर्यावरण चेतना  सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है, तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह प्राकृतिक एवं सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढ़ने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक…

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    1. सनातन धर्म एवं संस्कृति 

    अप्रैल मई 2015 मातृवंदनासभी कष्ट दूर हो जाते हैं l कोई समस्या शेष नहीं रहती है l विपदाओं का भी शमन हो जाता है l इसके लिए मनुष्य को सत्सनातन-धर्म का अनुसरण करना पड़ता है l वह धर्म मुख्यतः तीन बातों पर आधारित है – सत्य, सनातन और धर्म l  परम पिता परमात्मा विशाल दिव्य…

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    1. देश हमारा

    मातृवन्दना सितम्बर 2014 जन-जन का देख भाई चारा,विश्व हुआ हैरान हैदवी जुवान से प्रसंशा करता,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम——— वन्दे मातरमतरह तरह के फूल इसके,फूलदान में सब एक हैंसुगंध फैलाते चहुं ओर अपनी,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम————–वन्दे मातरमखेलना इन्हें पसंद तूफानों से,खुदको मिटा देना शान सेआन बान शान बनाए रखना,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम———- वन्दे मातरमबुरी…

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