श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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1. जल – धारा से
मातृवन्दना अक्तूबर 2013 थम जा, ऐ जल की धारा ! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा चैकडैम बन गया है इधर तू बाढ़ का भय दिखाना पीछे पहले गति मंद कर ले अपनी तू भूमि कटाव भी करना पीछेपहले चाल धीमी कर ले अपनी यहाँ रोकना है थोड़ी देररुक सके तो…
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1. भारतीय गुरुकुल परंपरा
12 अक्तूबर 2013 दिव्य हिमाचल प्रकृति में आध्यात्मिक एवं भौतिक ज्ञान-विज्ञान प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कोई जिज्ञासु-पुरुषार्थी विद्यार्थी ही नरेंद्र की तरह उसे जानने, समझने और पाने के लिए कृत संकल्प होता है और अपने सद्गुरु रामकृष्ण परमहंस जी के सान्निध्य और गुरुकुल में रहकर निरंतर प्रयास एवं अभ्यास करके स्वामी विवेकानन्द बनता है।…
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1. संपूर्ण लोक विकास : समस्या और समाधान
मातृवंदना जुलाई 2013 इस सृष्टि की संरचना कब हुई ? कहना कठिन है l सृष्टि के रचयिता ने जहाँ प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए आहार की व्यवस्था की है, वहां मनुष्य के जीवन से संबंधित हर पक्ष के साथ एक विपरीत पहलू भी जोड़ा है l जहाँ सुख है, वहां दुःख भी है…
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1. जल संचयन
ज्ञान वार्ता छमाही 2013 हमने बात वर्षा जल संचयन करने की मानी है, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण करने की ठानी है,बावड़ी, कुआँ, तलब, पोखर, जोहड़ का पानी,जंगल, पेड़-पोधे, खेतों में लाता है हरियाली,भू-जल दोहन नियम से अपनाओ,भू-जल बचाओ और जीवन बचाओ,आज बचाए पानी ने कल सबको बचाना है, बाग़ – बगीचे, फूलों पर भंवरों ने गुनगनाना…
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4. जंग अभी बाकी है
सितम्बर 2012 मातृवन्दना 15 अगस्त 1947 के दिन स्वदेशी राजनेताओं ने भारत की राजनैतिक सत्ता की बागडोर अपने हाथ ले ली। इसके साथ ही साथ कभी न डूबने वाले अंग्रेजी साम्राज्य का सूर्य, भारत में सदा के लिए अस्त हो गया। भारत से गोरे अंग्रेज चले गए, चेहरे बदल गए। शेष रह गया, अंग्रेजी प्रशासनिक ढांचा, व्यवस्था,…