जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    5. भारत जोड़ो – यह आज का नारा है

    मातृवंदना अक्तूबर 2017 अर्थात देश तोड़ने की बात बीते कल की हो गई है l अब देश जोड़ने की बात हो रही है l युगों से हमारा भारतवर्ष जो एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है, आज भी वैसा ही है l सदियों पूर्व सोने की चिड़िया – अखंड भारत की अपार सुख-समृद्धि देख कुछ गिने-चुने…

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    इन्सान

    इन्सान हूं मैंभेड़िए की खाल पहने हुए हूं, क्यों?बातें धर्म की करता हूं, मैंलहु बे गुनाहों का बहाता हूं, क्यों?करता हूं धर्म नाम पर हिंसाधर्म और पशुता में अन्तर रहा क्यामैं इन्सान कहलाता हूंबन गया पशु, अर्थ रहा क्या?हिंसा तो है धर्म पशु कासबको मरने की राह दिखाई हैहिंसा न कर वास्ता धर्म काचेतन बात…

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    आत्मावलोकन

    था इन्सान मगर मैनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान तो खुद बन बैठा हूंप्रभु को मैंने भुला दिया हैदेखा न कभी मैंने खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?जान लूं मैं खुद को पहलेफिर पूछूं, बता तू है कौन?दूसरों का चेहरा दिख जाताअपना कभी दिखता नहींहर दोष दूसरों का दिख जाताअपना एक भी दिखता नहींपहले दूसरों…

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    आत्म विस्मरण

    सदा चोट खाता हूं मैंबातों में, गैरों की आता हूंमेरे हित की होती हैंबात हितैशी की भूल जाता हूंइन्सान था पर मैंनेखुद से खुद वैर किया हैशैतान बना लिया मैने खुद कोप्रभु को मैंने भुला दिया हैजानता नहीं मैं खुद कोपूछता हूं, तू है कौन?क्या जान लूं? मैं पहले खुद कोफिर पूछूं, बता तू है…

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    आत्म विश्वास

    विषय वस्तु समझ आ जाएगीलोक-भ्रमण करके देख लेबात ज्ञान-विज्ञान की समझ आएगीसुसंगत करके देख लेविषय-वस्तु का ज्ञान-वर्धन हो जाएगासाहित्य-ग्रंथ पढ़कर देख लेयोग्यता में निखार आ जाएगाकलात्मक शिक्षण-प्रशिक्षण ले कर देख लेसांसारिक ज्ञान मिल जाएगासत्यनिष्ठ रह कर देख लेआत्म ज्ञान-विज्ञान बढ़ जाएगाविरही आंतरिक जिज्ञासा जगा कर देख लेज्ञान-विज्ञान का विस्तार हो जाएगाशैक्षणिक वातावरण बना कर देख…

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