श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं
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11. गुरु का महत्व
15 नवम्बर 2007 दैनिक जागरणभारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है। मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरु देवो भव। गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है क्योंकि वह बच्चे को नव…
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20. सीख
दैनिक जागरण 25 अक्तूबर 2007 ऐ तूफान! तेरी क्या हस्ती?जहां तू, वहां मैं चला,सहारा साथ लिए मस्ती,आंचल में तेरे मैं पला,चिंता नहीं, जिऊं या मरूं,घमण्ड न कर, तू प्यारे!प्रेरणा देता रहा, मैं आऊं पास तेरे,शीश अपना हथेली पर धारे,हो जाएं मेरे,जीवन प्राण न्यारे,ऐ तूफान! हूं नहीं कम मैं भी तुझसे,सीख दी तूने, सीख ले तू…
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9. विद्यार्थी जीवन आधार
14 अक्तूवर 2007 दैनिक जागरणजिस प्रकार मकान बनाने के लिए किसी निर्माता विशेषज्ञ के द्वारा मकान की नींव का निर्माण करने से पूर्व उसकी निर्माण- स्थली का सूक्षमता से निरीक्षण करना अनिवार्य होता है ठीक उसी प्रकार गुरुजनों द्वारा किसी विद्यार्थी जीवन को मूर्ति रूप देने से पूर्व विद्यार्थी जीवन का भी भली प्रकार जांच-परख…
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8. विद्यार्थी जीवन विकास
10 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरण खरबूजा खरबूजे को देख कर अपना रंग बदलता है – कहावत विश्व विख्यात है। परिवार में बच्चे और विद्यालय में विद्यार्थी आस-पड़ोस में जैसा देखते व सुनते हैं, वे स्वयं वैसा करने का प्रयत्न भी करते हैं। उन्हें वहां उत्तम संस्कार मिलें इसलिए माता-पिता और गुरु जन घर अथवा विद्यालय…
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7. हमारी राष्ट्रीय भाषा
9 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरणयह सत्य है कि हमारे देश के लोग, उनका रहन-सहन, खान-पान, आचार-व्यवहार, राष्ट्रीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उत्पादन से देश की सभ्यता और संस्कृति को बल मिलता है। उससे भारत की पहचान होती है। अगर कभी इसमें विद्यमान गुण व दोशों को समाज के सम्मुख अलिखित रूप में व्यक्त करना पड़े…