श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
शूल-अंगार
बढ़ा दिए तूने कदम तो सहन कर शूल-अंगार भी lमन बड़ा अड़ियल घोड़ा मनः भर थोड़ी सी हुंकार भी ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जाति
कौन सी जाति ? क्या है जाति ? है नहीं इससे तेरा कोई वास्ता lहै हर एक बन्दा खुदा का बन्दा , मनः है यही प्रेम का रास्ता ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
अपने हित की बात
सदा चोट खाता है, तू बातों में गैरों की आ जाता है lतेरे हित की होती हैं अपनी, मनः बात हितैषी की भूल जाता है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हिम्मत
पत्थर रख सीने पर, मोड़ दे दिशा लहरों की lकाम नहीं है कठिन, मनः बात है प्यारे हिम्मत की ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जिन्दगी
ओला गिरता जल में, बन जायेगा पानी lबर्फ पर लिखी जिन्दगी तेरी, मनः एक दिन बन जाएगी पानी ll