श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सम्मान भावना
लुटाया था अपना आप उसने तो तू उन्हें पूज रहा lक्यों पूजेगा, कौन तुझे ? मनः तू तो सबको लूट रहा ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
खुद को ढाल
सुहागा सत्य है, आग अहिंसा, सोना शरीर तपा ले lसांचे में खुद को ढाल, मनः मानव जीवन संवार ले l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हृदय की बात
सुन बात दूसरों की, कर ले भली प्रकार विचार lहृदय की बात पत्थर की लकीर, मनः कर तुरंत व्यवहार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
बढ़ना है आगे
पिछला काम निपटा दे, फिर तू बढ़ आगे lगति बना तू कुछ ऐसी अपनी, मनः तन आलस छोड़ कर भागे ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जीवन की सफलता
बातों में उनको न लगा, तू मुर्ख क्यों बनता है ?रह मग्न तू अपने कर्म में. मनः जीवन सफल बनता है l