श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
विकारी मन
विकारी कमजोर मन कभी सुमिरन काम न कर पाए lरंग बदले गिरगिट सम, मनः रंग एक आये, एक जाये ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
भारतीय नारी
कर्म करती चक्की सम, देखी मैंने भारतीय नारी है lभैंसे सम पीटता है क्यों ? मनः तेरी खो गई अक्कल सारी है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
चैन की वंशी
चैन की बंशी बजेगी, जब भ्रष्टाचार का होगा दूर अँधेरा lसदाचार का पालन करेगा बच्चा-बच्चा, मनः होगा फिर नया सवेरा ll