श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
विकारी मन
विकारी कमजोर मन कभी सुमिरन काम न कर पाए lरंग बदले गिरगिट सम, मनः रंग एक आये, एक जाये ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
भारतीय नारी
कर्म करती चक्की सम, देखी मैंने भारतीय नारी है lभैंसे सम पीटता है क्यों ? मनः तेरी खो गई अक्कल सारी है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
चैन की वंशी
चैन की बंशी बजेगी, जब भ्रष्टाचार का होगा दूर अँधेरा lसदाचार का पालन करेगा बच्चा-बच्चा, मनः होगा फिर नया सवेरा ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
शूल-अंगार
बढ़ा दिए तूने कदम तो सहन कर शूल-अंगार भी lमन बड़ा अड़ियल घोड़ा मनः भर थोड़ी सी हुंकार भी ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जाति
कौन सी जाति ? क्या है जाति ? है नहीं इससे तेरा कोई वास्ता lहै हर एक बन्दा खुदा का बन्दा , मनः है यही प्रेम का रास्ता ll