श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
अपने हित की बात
सदा चोट खाता है, तू बातों में गैरों की आ जाता है lतेरे हित की होती हैं अपनी, मनः बात हितैषी की भूल जाता है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हिम्मत
पत्थर रख सीने पर, मोड़ दे दिशा लहरों की lकाम नहीं है कठिन, मनः बात है प्यारे हिम्मत की ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जिन्दगी
ओला गिरता जल में, बन जायेगा पानी lबर्फ पर लिखी जिन्दगी तेरी, मनः एक दिन बन जाएगी पानी ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
ईर्ष्या
आग से खेलता है क्यों? वह रख बनाया करती है lतू इर्ष्या करता है क्यों ? मनः हँसते हुए को रुलाया करती है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सत्य
जान सके तो जान, सत्य ही है भगवान् lजायेगा तू पहचान, मनः थोड़ा-थोड़ा कर ध्यान ll