श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सदाचार
मुसीबत में करते जो आह नहीं, बूझने नहीं देते जो योगाग्नि को lसदाचार होता है संग उनके, मनः सतगुरु पार भव सागर ले जाने को ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मेहनत
कली बनता गुल, गुल खिलता है काँटों में lअभ्यास बनता है मेहनत, मनः होती नहीं मेहनत बातों में ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
अक्कल का गुल
महंदी रंग लाती है पत्थर पर घिसने के बाद lअक्कल का गुल खिलता है, मनः ठोकर खाने के बाद ll