श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मानसिक विकार
काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, अहंकार हैं सब नर्क के द्वार lइधर कहते हैं संत प्यारे, मनः उधर बताते हैं गुरुद्वार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
संतान
वह संतान अच्छी है, जो पावों पर अपने खड़ी है lकर्तव्य अपना समझती है, मनः समाज की सच्ची कड़ी है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सहारा
सहारा होता है जो बेसहारों का, वह दर्द हर लेता है lजहर नदी, नाले, झरनों का, मनः शांत समुद्र पी लेता है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
प्रेम
बिना दर्द के जो होता है, वह होता है प्रेम नहीं lदर्द नहीं होता जिसमें, मनः होता है वह प्रेम नहीं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
फ़कीर
राजा से फकीर अच्छा, दिलों पर राज करता है lदुःख में रहता है राजा, मनः जन, धन पर राज करता ll