श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
कड़वी बात
फूल मुरझा जाते हैं, सदा कलि भी कलि रहती नहीं l घाव भर जाते हैं, पर मनः बात कड़वी मिटती नहीं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हृदय की शुद्धि
कह गया कोई संत प्यारा , तू हृदय की शुद्धि कर ले l सदाचार का पालन कर, मनः पहले दोषों से दूरी कर ले l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
नियामक जीवन
साधारण जीवन दुर्बल है, नियामक सर्व शक्तिमान l जटिल समस्या समाधान करे, मनः तू भेद अमोल पहचान ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
कुछ तो अवश्य
कुछ तो अवश्य मिलेगा, तू पहले कर्म कर lफल तुझे जरुर मिलेगा, मनः पहले पूरा फर्ज कर ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मेहमान न बन
मेहमान न बन तू किसीका, रोजाना न कर तू आना जाना l मेहमान तू रहेगा नहीं, मनः बहुतों ने तो कुत्ता माना ll