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ब्राह्मण का अर्थ

दिनांक 20 अक्तूबर 2025

“ब्राह्मण” एक संस्कृत शब्द है जो “ब्रह्म” (परम सत्य, ज्ञान या ईश्वर) से बना है l इसका मूल अर्थ ज्ञान और सत्य के ज्ञाता व्यक्ति से है l
शास्त्रीय दृष्टि से – मनुस्मृति वेद और पुराणों के अनुसार – ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म (परमात्मा या सत्य ज्ञान) को जानने सिखाने और धर्म के पालन में तत्पर रहता है l
गुणों के आधार पर – ब्राह्मण की पहचान जन्म से नहीं, बल्कि गुण, कर्म और स्वभाव से होती है l भगवद्गीता अध्याय 18 श्लोक 42 में श्रीकृष्ण जी कहते हैं –
“शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च l ज्ञानं विग्यांनमास्तिक्यं ब्रह्म कर्म स्वभावजम ll”
अर्थ - जिसमें शांति, इन्द्रयों का नियंत्रण तप पवित्रता क्षमा सरलता ज्ञान विज्ञान और आस्तिकता जैसे गुण हों – वही ब्राह्मण कहलाता है l
सामाजिक दृष्टि से - सनातन समाज में ब्राह्मणों का कार्य था – वेदों का अध्ययन और अध्यापन, यज्ञ, संस्कार और पूजा - पाठ का संचालन, समाज को धर्म, नीति और संस्कृति की दिशा देना l
सार रूप में – ब्राह्मण वह व्यक्ति है जो ईश्वर, धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलता है तथा दूसरों को भी उसी मार्ग पर प्रेरित करता है l




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