जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

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    1. जल संचयन

    मातृवन्दना जून 2012 हमने बात वर्षा जल संचयन करने की मानी है, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण करने की ठानी है,बावड़ी, कुआँ, तलब, पोखर, जोहड़ का पानी,जंगल, पेड़-पोधे, खेतों में लाता है हरियाली,भू-जल दोहन नियम से अपनाओ,भू-जल बचाओ और जीवन बचाओ,आज बचाए पानी ने कल सबको बचाना है, बाग़ – बगीचे, फूलों पर भंवरों ने गुनगनाना है,परागण…

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    2. सनातन जीवन में धन की उपयोगिता

    मई 2012 मातृवन्दनाभारत ऋषि -मुनियों का देश  है। भारतीय मनीषियों  ने मानव जीवन को 100 वर्ष  तक मुख्यतः चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें प्रथम 25 वर्ष  ब्रह्मचर्य, 25 से 50 वर्ष  गृहस्थ, 50 से 75 वर्ष  वानप्रस्थ और 75 से 100 वर्ष  तक सन्यास आश्रम प्रमुख थे। उनके अपने विशेष  सिद्धांत थे, उच्च आदर्श  थे जिनके अनुसार मनुष्य  अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन…

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    1. स्लोगन जल बाईसा

    कश्मीर टाइम्स 6 मई 2012 जल है गुणों की खान, धरती की बढ़ाये शान, जल रहेगा,जीवन बचेगा, भू-जल बढ़ाओ,जीवन बचाओ, जल के संग,जल के रंग,जल है जहाँ, जीवन है वहां, जल, जीवन की आशा, सूखा, निराशा ही निराशा,जल की कहानी,जीवन की कहानी, जहाँ भू-जल सहारा है,वहां जीवन हमारा है, जल से पढ़, पेड़ों से जंगल,सूखे…

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    1. सत्सनातन जीने की कला

    मातृवंदना फरवरी 2012 किसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत…

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    1. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा

    आलेख – शिक्षा दर्पण ज्ञानवार्ता छमाही 2011 हिमाचल की मासिक पत्रिका “मातृवन्दना” अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित आलेख “मैकाले की सोच-1835 ई० में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है l इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है l ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकार्ड में सुरक्षित है l लार्ड मैकाले…

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    4. ठगी का नया दौर !

    मातृवंदना सितंबर 2011 सामाजिक जन चेतना जहाँ भारत को जिस तेजी के साथ विश्व की भावी आर्थिक शक्ति माना जाने लगा है, उससे भी तीव्र गति से देश में सक्रिय कुछ देशी, विदेशी अंतर्राष्ट्रीय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनके एजेंटों की अनैतिक गति विधियों के द्वारा लोगों की जेबों में दिन – दिहाड़े डाका भी…

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    3. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा – प्रणाली

    जुलाई 2011 मातृवंदनाहिमाचल की मासिक पत्रिका मातृवंदना अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित लेख “मैकाले की सोच-1835 ई0 में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है। इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है। ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकाॅर्ड में सुरक्षित है। लाॅर्ड मैकाले को भारत में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लाॅर्ड…

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    2. माँ

    जून 2011 मातृवन्दना सिंहनी बलवान सिंह जन्म देकर सदा अभय होकर सोती है गधी दस गधों की माँ होकर भी दुःख पाती, बोझा ढोती है सौ पुत्र थे, गन्धारी- धृतराष्ट्र के, दुःख ही दुःख पाया था पांच थे कुंती के प्यारे पांडव, दुःख में भी सुख पाया था माँ ! तू जनना धर्म परायण,ज्ञाननिष्ठ, कला…

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    1. मेहनत का राज

    मई 2011 मातृवन्दना मेहनत करने वालों को कम बहुत हैं नहीं करने वालों को हैं बहुत बहाने वही कहें आंगन टेढ़ाजो कभी नाचना न जाने मेहनत लग्न से होती है दिल – दिमाग एक करना जो जाने मेहनत करने वालों को कम बहुत हैं नहीं करने वालों को हैं बहुत बहाने जबरन न उनको कम…

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    2. शिक्षा और अध्यात्म ने जोड़ा है बिखरा समाज

    मातृवंदना अप्रैल 2011 सत्य ब्रह्म है और ब्रह्म ही सत्य है l ऐसा वेद कहते हैं l वेद भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के दिव्य आधार स्तंभ रहे हैं जो सदियों से मानव जाति में सत्य, कर्म, धर्म और शौर्यता का संचार करते आये हैं l हमारे पूर्वज आर्य थे l आर्य सत्यप्रिय, कर्मनिष्ठ, धार्मिक और…

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