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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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1. समाज एवं राष्ट्र की सुरक्षा के मानदंड
जनवरी 2014 मातृवन्दना व्यक्तिगत और पारिवारिक सुरक्षा से बड़ी सामाजिक सुरक्षा है और सामाजिक सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा है। अतएव देश के भविष्य हेतु हमारे युवाओं को कुछ मानदंड स्थापित करने होंगे जिनके लिए उन्हें निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होगा1 मानव समाज सदैव वीरों की पूजा करता है, कायरों की नहीं।2 समाज में…
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3. भू-जल स्तर में कैसे होगी वृद्धि ?
दिसम्बर 2013 मातृवंदना पर्यावरण चेतना भू-जल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है l इससे भूजल स्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है l इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे l जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का…
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2. स्लोगन जल बाईसा
ज्ञान वार्ता छमाही 2013 जल है गुणों की खान, धरती की बढ़ाये शान, जल रहेगा,जीवन बचेगा, भू-जल बढ़ाओ,जीवन बचाओ, जल के संग,जल के रंग,जल है जहाँ, जीवन है वहां, जल, जीवन की आशा, सूखा, निराशा ही निराशा,जल की कहानी,जीवन की कहानी, जहाँ भू-जल सहारा है,वहां जीवन हमारा है, जल से पढ़, पेड़ों से जंगल,सूखे में…
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2. युवा पीढ़ि और उसका दायित्व
अक्तूबर 2013 मातृवन्दना ईश्वर द्वारा रचित प्रकृति में पृथ्वी और उसके चारों ओर ब्रह्माण्ड बड़ा विचित्र है। सूर्य में ताप, चन्द्रमा में चांदनी, वायु में सरसराहट और नदियों में कल-कल मधुर संगीत का मिश्रण इस बात का द्योतक है कि समस्त ब्रह्माण्ड में कोेेई भी अमुक वस्तु किसी न किसी गुण विशेष के लिए अपना महत्व…
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1. जल – धारा से
मातृवन्दना अक्तूबर 2013 थम जा, ऐ जल की धारा ! छोड़ उतावली, बहे जाती है किधर?मुंह उठा, देख तो जरा चैकडैम बन गया है इधर तू बाढ़ का भय दिखाना पीछे पहले गति मंद कर ले अपनी तू भूमि कटाव भी करना पीछेपहले चाल धीमी कर ले अपनी यहाँ रोकना है थोड़ी देररुक सके तो…
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1. भारतीय गुरुकुल परंपरा
12 अक्तूबर 2013 दिव्य हिमाचल प्रकृति में आध्यात्मिक एवं भौतिक ज्ञान-विज्ञान प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। कोई जिज्ञासु-पुरुषार्थी विद्यार्थी ही नरेंद्र की तरह उसे जानने, समझने और पाने के लिए कृत संकल्प होता है और अपने सद्गुरु रामकृष्ण परमहंस जी के सान्निध्य और गुरुकुल में रहकर निरंतर प्रयास एवं अभ्यास करके स्वामी विवेकानन्द बनता है।…
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1. संपूर्ण लोक विकास : समस्या और समाधान
मातृवंदना जुलाई 2013 इस सृष्टि की संरचना कब हुई ? कहना कठिन है l सृष्टि के रचयिता ने जहाँ प्रत्येक प्राणी को जीवित रहने के लिए आहार की व्यवस्था की है, वहां मनुष्य के जीवन से संबंधित हर पक्ष के साथ एक विपरीत पहलू भी जोड़ा है l जहाँ सुख है, वहां दुःख भी है…
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1. जल संचयन
ज्ञान वार्ता छमाही 2013 हमने बात वर्षा जल संचयन करने की मानी है, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण करने की ठानी है,बावड़ी, कुआँ, तलब, पोखर, जोहड़ का पानी,जंगल, पेड़-पोधे, खेतों में लाता है हरियाली,भू-जल दोहन नियम से अपनाओ,भू-जल बचाओ और जीवन बचाओ,आज बचाए पानी ने कल सबको बचाना है, बाग़ – बगीचे, फूलों पर भंवरों ने गुनगनाना…
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4. जंग अभी बाकी है
सितम्बर 2012 मातृवन्दना 15 अगस्त 1947 के दिन स्वदेशी राजनेताओं ने भारत की राजनैतिक सत्ता की बागडोर अपने हाथ ले ली। इसके साथ ही साथ कभी न डूबने वाले अंग्रेजी साम्राज्य का सूर्य, भारत में सदा के लिए अस्त हो गया। भारत से गोरे अंग्रेज चले गए, चेहरे बदल गए। शेष रह गया, अंग्रेजी प्रशासनिक ढांचा, व्यवस्था,…
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3. दस्तक – संपूर्ण क्रांति की
सितम्बर 2012 मातृवन्दनाइसमें लेश मात्र भी संदेह नहीं है कि युगों-यगों से भारतीय सनातन गुरुकुल शिक्षा-प्रणाली ने विश्व की विशाल धरती पर समस्त मानव समाज, संस्कृत स्थानीय भाषा , विद्या-कला, ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति तथा वैदिक साहित्य – दर्शन , शास्त्र आदि का सृजन, पोषण , रक्षा और उसका विकास किया। समस्या व्यक्तित्व विकास की रही हो या आर्थिक, सामाजिक रही हो या…