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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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तीन शत्रु
आलस्य, झूठ, और अभिमान तीनों हैं तेरे शत्रु महान lएक को भी निकट न आने देना, मनः सुन ले तू देकर ध्यान ll
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आशाओं का अँधेरा
आशाओं के घोर अँधेरे में, क्यों खो गया तेरा जीवन है ?तालाश खुद की खुद कर, मनः नाहक बना क्यों दीन-हीन है ll
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विपदा
मुसीबत आ गई तो आने दे विपदा नहीं है कोई खास lनरमी-गर्मी का मौसम है, मनः तू हुआ है क्यों उदास ll
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सम्मान भावना
लुटाया था अपना आप उसने तो तू उन्हें पूज रहा lक्यों पूजेगा, कौन तुझे ? मनः तू तो सबको लूट रहा ll
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खुद को ढाल
सुहागा सत्य है, आग अहिंसा, सोना शरीर तपा ले lसांचे में खुद को ढाल, मनः मानव जीवन संवार ले l
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हृदय की बात
सुन बात दूसरों की, कर ले भली प्रकार विचार lहृदय की बात पत्थर की लकीर, मनः कर तुरंत व्यवहार ll
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जीवन की सफलता
बातों में उनको न लगा, तू मुर्ख क्यों बनता है ?रह मग्न तू अपने कर्म में. मनः जीवन सफल बनता है l