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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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भारतीय नारी
कर्म करती चक्की सम, देखी मैंने भारतीय नारी है lभैंसे सम पीटता है क्यों ? मनः तेरी खो गई अक्कल सारी है ll
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चैन की वंशी
चैन की बंशी बजेगी, जब भ्रष्टाचार का होगा दूर अँधेरा lसदाचार का पालन करेगा बच्चा-बच्चा, मनः होगा फिर नया सवेरा ll
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जाति
कौन सी जाति ? क्या है जाति ? है नहीं इससे तेरा कोई वास्ता lहै हर एक बन्दा खुदा का बन्दा , मनः है यही प्रेम का रास्ता ll
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अपने हित की बात
सदा चोट खाता है, तू बातों में गैरों की आ जाता है lतेरे हित की होती हैं अपनी, मनः बात हितैषी की भूल जाता है ll
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ईर्ष्या
आग से खेलता है क्यों? वह रख बनाया करती है lतू इर्ष्या करता है क्यों ? मनः हँसते हुए को रुलाया करती है ll