जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • घर

    नारी एक – रूप अनेक -माँ, बहन, बहु और बेटी से ही हर घर संवरता है, इन्हें हर परिवार में उचित सम्मान मिलना चाहिए lघर स्वर्ग – धरती पर वह घर स्वर्ग समान है, जहाँ बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं lघर तीर्थ – जो सन्तान आज्ञाकारी है, अपने माता-पिता की सेवा करती है, उसे…

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  • परिवार

    नारी आभाव -जब कोई दो पहिया वाहन किसी एक पहिये के बिना नहीं चल सकता है तो नारी अभाव में परिवार मात्र नर से कैसे चल सकता है !परिवार –- जिस परिवार में आपसी प्रेम, सोहार्द व् शान्ति नहीं, उस घर की समस्त सुख-सुविधाएं किस काम की l – परिवार एक वह ठोस इकाई है…

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  • मानव

    प्राणी जातियां – विश्वभर में विभिन्न प्राणियों की अनेकों जातियां पाई जाती हैं l उन जातियों में मानव भी एक जाति है जो अन्य प्राणियों से भिन्न है – दो हाथ, दो पैर, मुंह, नाक, कान, आँखें अर्थात वह पांच कर्मेन्द्रियाँ पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, अहंकार का स्वामी है l जैसे गाये को भैंस और…

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  • गुरु – आचार्य

    – # विद्यार्थी को तराशकर एक योग्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कोई बना सकता है तो वह गुरु ही हो सकता है l* – दूषित राजनीति से छुटकारा दिलाने हेतु चाणक्य जैसे आचार्यों को, चन्द्र गुप्त मौर्य जैसे विद्यार्थियों के साथ, आगे अवश्य आना पड़ता है l – जब जब चाणक्य जैसा कोई आचार्य…

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  • प्रभु प्रमाण

    हजार करो तीर्थ, लाख करो स्नान, जिसका हृदय साफ नहीं, कैसे प्रत्यक्ष मिले प्रभु प्रमाण ?

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  • जाति भेद – भाव

    मानव जाति भेद-भाव की दीवारें तोड़ो, जन-जन का मानव संग नाता जोड़ो l

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  • विद्याओं में पारंगता

    # अगर हम जीवन चुनौतियों का सामना करने में शास्त्र – शस्त्र विद्याओं में पारंगत नहीं हुए तो एक दिन विधर्मियों द्वारा बांस की भांति छिल दिए जायेंगे l*

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  • सशक्त व्यक्ति

    जीवन लक्ष्य –जीवन लक्ष्य की प्राप्ति, चुनौतियों का सामना किये बिना संभव नहीं lजीवन सार –जीवन – सार सबकी समझ में आने वाली वस्तु नहीं है l वह सत्य है और ये झूठ l वह दिन है और ये रात l

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  • सात्विक बुद्धि

    वेद और वैदिक ज्ञान के बिना मनुष्य जाति में सात्विक बुद्धि नहीं आ सकती l

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  • शिक्षा

    – गुरु – शिष्य के जिस संयुक्त प्रयास से शिष्य के जीवन का चहुँमुखी अर्थात शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास होता है , शिक्षा कहलाती है l- # हर मंदिर, मठ में वेदाचार्य की नियुक्ति करनी चाहिए जो स्थानीय बालक/बालिकाओं को वैदिक विद्याओं का शिक्षण – प्रशिक्षण दे सकें l*

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