नवीन लेख
विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
-
नवीनतम लेख
सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
-
11. गुरु का महत्व
15 नवम्बर 2007 दैनिक जागरणभारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है। मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरु देवो भव। गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है क्योंकि वह बच्चे को नव…
-
20. सीख
दैनिक जागरण 25 अक्तूबर 2007 ऐ तूफान! तेरी क्या हस्ती?जहां तू, वहां मैं चला,सहारा साथ लिए मस्ती,आंचल में तेरे मैं पला,चिंता नहीं, जिऊं या मरूं,घमण्ड न कर, तू प्यारे!प्रेरणा देता रहा, मैं आऊं पास तेरे,शीश अपना हथेली पर धारे,हो जाएं मेरे,जीवन प्राण न्यारे,ऐ तूफान! हूं नहीं कम मैं भी तुझसे,सीख दी तूने, सीख ले तू…
-
9. विद्यार्थी जीवन आधार
14 अक्तूवर 2007 दैनिक जागरणजिस प्रकार मकान बनाने के लिए किसी निर्माता विशेषज्ञ के द्वारा मकान की नींव का निर्माण करने से पूर्व उसकी निर्माण- स्थली का सूक्षमता से निरीक्षण करना अनिवार्य होता है ठीक उसी प्रकार गुरुजनों द्वारा किसी विद्यार्थी जीवन को मूर्ति रूप देने से पूर्व विद्यार्थी जीवन का भी भली प्रकार जांच-परख…
-
8. विद्यार्थी जीवन विकास
10 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरण खरबूजा खरबूजे को देख कर अपना रंग बदलता है – कहावत विश्व विख्यात है। परिवार में बच्चे और विद्यालय में विद्यार्थी आस-पड़ोस में जैसा देखते व सुनते हैं, वे स्वयं वैसा करने का प्रयत्न भी करते हैं। उन्हें वहां उत्तम संस्कार मिलें इसलिए माता-पिता और गुरु जन घर अथवा विद्यालय…
-
7. हमारी राष्ट्रीय भाषा
9 अक्तूबर 2007 दैनिक जागरणयह सत्य है कि हमारे देश के लोग, उनका रहन-सहन, खान-पान, आचार-व्यवहार, राष्ट्रीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उत्पादन से देश की सभ्यता और संस्कृति को बल मिलता है। उससे भारत की पहचान होती है। अगर कभी इसमें विद्यमान गुण व दोशों को समाज के सम्मुख अलिखित रूप में व्यक्त करना पड़े…
-
6. विद्यार्थी जीवन आदर्श
25 सितम्बर 2007 दैनिक जागरणअगर कोई स्थानीय व्यक्ति अच्छा खाता-पीता, सोता है और उसके बारे में लोग कहें कि उसका जीवन सर्वश्रेष्ठ है तो एक विद्यार्थी भी उनकी हां में हां मिलाए क्या? नहीं, वह जानता है कि सुखी जीना मात्र खाने-पीने, सोने तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह जीवन की एक कला है।…
-
5. कर्तव्य विमुखता का काला साया
आलेख – सामाजिक चेतना दैनिक जागरण 6 सितंबर 2007 आज बुराई का प्रतिरोध करने वाला हमारे बीच समाज में कोई एक भी साहसी, वीर, पराक्रमी, बेटा, जन नायक, योद्धा अथवा सिंहनाद करने वाला शेर नौजवान दिखाई नहीं दे रहा है l मानों जननियों ने ऐसे शेरों को पैदा करना छोड़ दिया है l गुरुजन योद्धाओं…
-
4. “विद्यार्थी जीवन कल्याण मंच”
दैनिक जागरण 2.9.2007 प्राचीन काल की तरह माता-पिता व गुरुजनों को आज मात्र स्वयं ही को नहीं जगाना है बल्कि स्वयं जागकर बाल, विद्यार्थी, स्नातक और युवा वर्ग को भी जगाना है l वे अब भी स्वयं और परहित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं l उनमें लौकिक एवं अलौकिक कार्य कर सकने की…
-
1. जय राष्ट्रीय निशान
मातृवन्दना अगस्त 2007 जय राष्ट्रीय निशानरहे सदा तेरी पहचानकेसरिया वीरता उत्साह त्याग का सूचकआन शान मान का पूजकनहीं था तू अनादर करने के योग्यजलते देखते हैं यहां वहां हमारे प्राणजय राष्ट्रीय निशानश्वेत सत्य पवित्रता शांति का प्रतीकनहीं है आज यहां सब दिखता ठीकगए कहां गुरु देते थे जो हमें सीखकर्तव्य अपना भूल गए होता नहीं…
-
3. जनहित विरोधी मानसिकता
25 अगस्त 2007 दैनिक जागरण सामाजिक जन चेतना “भारत देश महान” जैसी बातें अब नीरस और खोखली लगने लगी हैं l मन्दिर समान पवित्र घर और विद्यालयों में जहाँ कभी ज्ञान, श्रद्धा, प्रेम-भक्ति और विश्वास पाया जाता था, वहां पर अज्ञान, अश्रद्धा, अवज्ञा, अविश्वास होने के साथ-साथ अवैध संबंध, भ्रूण हत्याएं, बात-बात पर वाद-विवाद, मार-पीट, मन-मुटाव,…