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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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मक्कारी
# समाज में क्षेत्र, भाषा, जाति, धर्म, ऊंच-नीच, रंग, मत, पंथ, संप्रदाय, लिंगादि भेद-भाव फैलाना और सनातनी समाज, देश, धर्म- संस्कृति को मिटाना मक्कारों की ही राजनीति है। *
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व्यवस्था
# जिस व्यवस्था में असत्य, अधर्म, अन्याय और अनीति का बोलबाला हो उसे बदल देने में ही जन, समाज और राष्ट्र का हित है।*
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प्रत्याशी
# ऐसे प्रत्याशी को वोट देने से क्या लाभ जो न तो सत्यनिष्ठ है न धर्मपरायण, न न्यायप्रिय है और न ही नीतिवान ।* सम्मान की आशा –# जो व्यक्ति या उसका विचार हमारे देश और धर्म का अपमान करता है, वह हम से अपने सम्मान की आशा कैसे कर सकता !*
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वैश्य – धर्मवीर
– # वैश्य वर्ण मानव समाज में आर्थिक सुख – समृद्धि लाता है ।*- # जो व्यक्ति सत्य, धर्म, न्याय और नीति के हित में अपनी कमाई का कुछ अंश दान करता है, वैश्य कहलाता है ।*- # वैश्य वह कलाकार है जो अपनी कला से मिट्टी को भी सोने में बदल सकता है ।*
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वर्ण की उत्पत्ति
# बालक का जन्म परिवार में होता है लेकिन किसी वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र की उत्पत्ति उसके गुण संस्कार और स्वभावानुसार गुरुकुल में ही होती है।*
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ब्राह्मण का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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क्षत्रिय का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में क्षत्रिय का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार ब्राह्मण, वैश्य और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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वैश्य का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में वैश्य का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार क्षत्रिय, ब्राह्मण और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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शूद्र का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में शूद्र का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय का भी कार्य कर सकता है।*