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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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1. आइये ! राष्ट्रभाव की जोत जगाएं
आलेख – मातृवंदना मार्च अप्रैल 2019 हम भारतवासी भारत के नागरिक हैं तो हमारा यह भी दायित्व बन जाता है कि हम देशहित में ही कार्य करें l हम जो भी कार्य कर रहे हैं, देश हित में कर रहे हैं l इस सोच के साथ हर कार्य करने से देश का विकास होना निश्चित…
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1. साधक आत्मोवाच
मातृवन्दना दिसम्बर 2018 रख सके तो याद रख है तेरा पांच तत्व का शरीर – रथ जहाँ ले जाना चाहे इसको हांके ले जा, हो के मस्त हैं नामी बलवान बहुत इसके दस इन्द्रिय घोड़े जब भी बे-लगाम हो जाये कोई दिशा छोड़ विषय रसास्वादन हेतु दौड़े शत्रु हैं भयानक अहं, मोह, लोभ,…
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2. भारत का भविष्य
मातृवंदना अक्तूबर 2018 आश्चर्य है कि सनातन धर्म अति प्राचीन होने पर भी संपूर्ण संसार में आज तक हिन्दुओं का अपना कहीं एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है, परन्तु धर्म से प्रेरित मुट्ठीभर लुटेरे, आतंकवादियों ने मात्र डेढ़ दो हजार वर्षों में ही धर्म के नाम पर छप्पन मुस्लिम देश और अस्सी ईसाई देश ही…
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1. जागेगा स्वाभिमान जमाना देखेगा
आलेख – राष्ट्रीय भावना मातृवंदना जनवरी 2018 प्राचीन काल से ही हमारा देश एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है भारत के ऋषि-मुनियों का संपूर्ण जीवन ज्ञान-विज्ञान अनुसन्धान एवंम शिक्षण-प्रशिक्षण कार्य में व्यतीत हुआ है उन्होंने सनातन संस्कृति में मानव जीवन को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास जीवन चार श्रेणियों में विभक्त किया था l वे…
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5. भारत जोड़ो – यह आज का नारा है
मातृवंदना अक्तूबर 2017 अर्थात देश तोड़ने की बात बीते कल की हो गई है l अब देश जोड़ने की बात हो रही है l युगों से हमारा भारतवर्ष जो एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है, आज भी वैसा ही है l सदियों पूर्व सोने की चिड़िया – अखंड भारत की अपार सुख-समृद्धि देख कुछ गिने-चुने…
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दुष्टों के उपद्रव
अनमोल वचन :-“जिस राजा के राज्य में दुष्टों के उपद्रव से सारी प्रजा त्रस्त रहती है उस मतवाले राजा की कीर्ति, आयु, ऐश्वर्य और प्रलोक नष्ट हो जाते हैं “।
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पात्र-अपात्र
अनमोल वचन :-सांपों को दूध पिलाना केवल उनके विष को बढ़ाता है, इसी प्रकार मूर्खों को दिया हुआ उपदेश उन्हें प्रकुपित ही करता है, न कि शांत । अतः हमें प्रत्येक कार्य में पात्र-अपात्र का अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए ।
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मनुष्य के पास
अनमोल वचन :- “मनुष्य के पास सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख क्रमशः आते रहते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे रथचक्र की नेमी के इधर-उधर घूमते हैं”।