जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • ,

    1. आइये ! राष्ट्रभाव की जोत जगाएं

    आलेख – मातृवंदना मार्च अप्रैल 2019 हम भारतवासी भारत के नागरिक हैं तो हमारा यह भी दायित्व बन जाता है कि हम देशहित में ही कार्य करें l हम जो भी कार्य कर रहे हैं, देश हित में कर रहे हैं l इस सोच के साथ हर कार्य करने से देश का विकास होना निश्चित…

    पढ़ें

  • ,

    1. साधक आत्मोवाच

    मातृवन्दना दिसम्बर 2018   रख सके तो याद रख है तेरा पांच तत्व का शरीर – रथ जहाँ ले जाना चाहे इसको हांके ले जा, हो के मस्त    हैं नामी बलवान बहुत इसके दस इन्द्रिय घोड़े जब भी बे-लगाम हो जाये कोई दिशा छोड़ विषय रसास्वादन हेतु दौड़े शत्रु हैं भयानक अहं, मोह, लोभ,…

    पढ़ें

  • ,

    2. भारत का भविष्य

    मातृवंदना अक्तूबर 2018 आश्चर्य है कि सनातन धर्म अति प्राचीन होने पर भी संपूर्ण संसार में आज तक हिन्दुओं का अपना कहीं एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है, परन्तु धर्म से प्रेरित मुट्ठीभर लुटेरे, आतंकवादियों ने मात्र डेढ़ दो हजार वर्षों में ही धर्म के नाम पर छप्पन मुस्लिम देश और अस्सी ईसाई देश ही…

    पढ़ें

  • ,

    1. जागेगा स्वाभिमान जमाना देखेगा

    आलेख – राष्ट्रीय भावना मातृवंदना जनवरी 2018 प्राचीन काल से ही हमारा देश एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है भारत के ऋषि-मुनियों का संपूर्ण जीवन ज्ञान-विज्ञान अनुसन्धान एवंम शिक्षण-प्रशिक्षण कार्य में व्यतीत हुआ है उन्होंने सनातन संस्कृति में मानव जीवन को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास जीवन चार श्रेणियों में विभक्त किया था l वे…

    पढ़ें

  • ,

    5. भारत जोड़ो – यह आज का नारा है

    मातृवंदना अक्तूबर 2017 अर्थात देश तोड़ने की बात बीते कल की हो गई है l अब देश जोड़ने की बात हो रही है l युगों से हमारा भारतवर्ष जो एक अध्यात्म प्रिय देश रहा है, आज भी वैसा ही है l सदियों पूर्व सोने की चिड़िया – अखंड भारत की अपार सुख-समृद्धि देख कुछ गिने-चुने…

    पढ़ें

  • दुष्टों के उपद्रव

    अनमोल वचन :-“जिस राजा के राज्य में दुष्टों के उपद्रव से सारी प्रजा त्रस्त रहती है उस मतवाले राजा की कीर्ति, आयु, ऐश्वर्य और प्रलोक नष्ट हो जाते हैं “।

    पढ़ें

  • पात्र-अपात्र

    अनमोल वचन :-सांपों को दूध पिलाना केवल उनके विष को बढ़ाता है, इसी प्रकार मूर्खों को दिया हुआ उपदेश  उन्हें प्रकुपित ही करता है, न कि शांत । अतः हमें प्रत्येक कार्य में पात्र-अपात्र का अवश्य  ही ध्यान रखना चाहिए ।

    पढ़ें

  • वनराज

    अनमोल वचन :-“वन के राजा शेर का न अभिषेक किया जाता है और न ही कोई संस्कार। वह तो अपने पराक्रम के बल बूते ही जंगल का राजा होता है”।

    पढ़ें

  • मनुष्य के पास

    अनमोल वचन :- “मनुष्य के पास सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख क्रमशः आते रहते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे रथचक्र की नेमी के इधर-उधर घूमते हैं”।

    पढ़ें

  • समाज को

    अनमोल वचन :- “जीवन में समाज की ओर से मुझे जितना मिला, उससे अधिक मैं समाज को दूंगा। हे भगवान हमारी यह प्रार्थना तू पूर्ण कर”।

    पढ़ें