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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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सफलता के मूल स्रोत
दिनांक 15.10.26 जीवन में कोई भी उचित कार्य करना, किसी भी व्यक्ति का अपना जीवन उद्देश्य हो सकता है l उसमे सफलता प्राप्त करनी है तो उस व्यक्ति को उसके नियमों का पालन करना आवश्यक होता है l नियम पालन किये बिना उद्देश्य की प्राप्ति करना बहुत कठिन हो सकता है l अगर नियम…
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4. आतताई नहीं, मानवतावादी बनो
आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2020 “मनु व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप” लेख में डा० बीसी चौहान ने लिखा है l मनुस्मृति के अध्याय 3 के श्लोक 167 और 168 के अनुसार – चारों वर्णों के पितर वैदिक ऋषि थे l ब्राह्मण वर्ण के पितर भृगु ऋषि के पुत्र सोम थे l क्षत्रिय अंगीरा ऋषि…
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2. कला – साधना जीवनोपयोगी है
आलेख – मातृवन्दना जुलाई अगस्त 2020 जीना भी एक कला है l जो व्यक्ति भली प्रकार जीना सीख जाता है, वह मानों उसके लिए सोने पर सुहागा l भली प्रकार जीने के लिए व्यक्ति का किसी न किसी कला के साथ जुड़े रहना अति आवश्यक है भी l मनुष्य को मांस-मदिर और धुम्रपान से सदैव…
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1. डिह्बकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में समरसता
आलेख – धर्म संस्कृति मातृवन्दना मार्च अप्रैल 2020 ऋषि-मुनि, सिद्ध, सन्यासी, साधु-सन्त, महात्मा और परमात्मा के साथ जुड़े माणिकों एवं अलंकारों से सुशोभित, भारत माता के सरताज, देव और वीरभूमि हिमाचल प्रदेश की तराई में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है जिला कांगड़ा, का प्रवेश द्वार नूरपुर, के उत्तर में सहादराबान से सर्पाकार एवं घुमावदार सड़क…
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3. जल संग्रहण और उसकी उपयोगिता
जनवरी 2020 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 4 हर स्थान पर नहरें व समयानुकूल वर्षा न होने से एकमात्र नलकूप ही खेतों की सिंचाई करने के संसाधन होते हैं l खेतों की सिंचाई करने हेतु नलकूपों की आवश्यकता पड़ती है l उनसे सिंचाई की जाती है l आवश्यक है, भूजल दोहन नियमित और फसल की आवश्यकता…
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7. गुरु का महत्व
आलेख – शिक्षा दर्पण मातृवंदना नवंबर 2019भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरी है l घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है l शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है l “मातृदेवो भवः, पितृ देवो भवः, गुरु देवो भवः l गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है…
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6. ख़ुशी का पर्व – दीपावली
अक्तूबर 2019 मातृवन्दना भारत वर्ष विभिन्न – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुओं का देश है l वर्षा ऋतु के अंत में जैसे ही शरद ऋतु का आरम्भ होता है उसके साथ ही नवरात्रि – दुर्गा पूजन और राम लीला मंचन भी एक साथ आरम्भ हो जाते हैं l दुर्गा पूजन एवं राम…
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5. अनुच्छेद 370 तब और अब
आलेख – राष्ट्रीय भावना – मातृवंदनासितम्बर 2019 भारत को स्वतंत्रता मिलने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को जम्मू-कश्मीर भी स्वतंत्र हो गया था l उस समय यहाँ के शासक महाराजा हरि सिंह अपने प्रान्त को स्वतंत्र राज्य बनाये रखना चाहते थे l लेकिन 20 अक्तूबर 1947 को कबालियों ने पकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर…
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4. जल संकट और उसका समाधान
अगस्त 2019 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 3भारत पाक विभाजन के पश्चात् बंगलादेशी और रोहिंग्या शरणार्थी मुसलमानों का भारत में तेजी के साथ आगमन हुआ है l मुसलमानों में बहु विवाह करने, अनेकों पत्नियाँ रखने और हर पत्नी से दर्जनों बच्चे पैदा करने की परंपरा, का आज भी प्रचलन जारी है l इस कारण छह-सात दशकों…
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3. गुरुकुल शिक्षा पद्दति और संस्कार
आलेख – परम्परागत गुरुकुल शिक्षा मातृवन्दना जुलाई 2019प्राचीन भारतीय निशुल्क शिक्षा-प्रणाली अपने आप में विशाल हृदयी होने के कारण विश्वभर में जानी और पहचानी गई थी l भारत विश्वगुरु कहलाया था l भारतीय शिक्षा गुरुकुल परंपरा पर आधारित थी जिसमे सहयोग, सहभोज, सत्संग, लोकानुदान की पवित्र भावना, सद्विचार, सत्कर्मों से विश्व का कल्याण होता था…
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2. अपने प्रति अपनी सजगता
मातृवन्दना मई 2019 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के पश्चात् परत…