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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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वैश्य – धर्मवीर
– # वैश्य वर्ण मानव समाज में आर्थिक सुख – समृद्धि लाता है ।*- # जो व्यक्ति सत्य, धर्म, न्याय और नीति के हित में अपनी कमाई का कुछ अंश दान करता है, वैश्य कहलाता है ।*- # वैश्य वह कलाकार है जो अपनी कला से मिट्टी को भी सोने में बदल सकता है ।*
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वर्ण की उत्पत्ति
# बालक का जन्म परिवार में होता है लेकिन किसी वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र की उत्पत्ति उसके गुण संस्कार और स्वभावानुसार गुरुकुल में ही होती है।*
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ब्राह्मण का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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क्षत्रिय का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में क्षत्रिय का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार ब्राह्मण, वैश्य और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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वैश्य का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में वैश्य का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार क्षत्रिय, ब्राह्मण और शूद्र का भी कार्य कर सकता है।*
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शूद्र का बेटा
# वर्ण व्यवस्था में शूद्र का बेटा अपने गुण, संस्कार, स्वभाव अनुसार ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय का भी कार्य कर सकता है।*
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वर्ण व्यवस्था
# वर्ण व्यवस्था में चारों वर्ण एक दूसरे के पूरक हैं, कोई छोटा-बड़ा या छूत-अछूत नहीं है, जिसे विश्वास न हो उसे मुगल आगमन से पूर्व भारत का प्राचीन इतिहास पढ़ना चाहिए। *
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आस्था
ऋग्वेद में ज्ञान है l यजुर्वेद में कर्मकाण्ड है l सामवेद में उपासना है l अथर्वेद में विज्ञान है l सनातन धर्म करता विश्व कल्याण है l प्रार्थना -# सार्थक प्रार्थना मन से ही हो सकती है, वाणी से नहीं । वाणी से प्रार्थना हो और मन कहीं ओर भटक रहा हो तो उस प्रार्थना…
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शिक्षा का उद्देश्य
# प्राइवेट स्कूलों का उद्देश्य शिक्षा देना हो या न हो परंतु धन कमाना तो अवश्य ही है।*