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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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मंदिर
# मंदिर आएं तो भक्त बनकर आएं, पर्यटक बनकर नहीं। मंदिर आस्था केंद्र, पूजा स्थल हैं, कोई पर्यटक स्थल नहीं।*
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शूद्र-कर्मवीर
– # शूद्र वह कलाकार है जो अपनी हस्त कला से मिट्टी, पत्थर, लकड़ी को भी साक्षात चित्र/मूर्ती, वस्तु, भवन, सेतु में बदल सकता है।*- # जो व्यक्ति सत्य, धर्म, न्याय और नीति के हित में अपनी कला – विद्या का सृजन, पोषण, वर्धन करता है, शूद्र कहलाता है।*- # शूद्र वर्ण संपूर्ण मानव समाज…
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मतदान
# वोट उसी को देना चाहिए जो देश सनातन – धर्म, संस्कृति के हित में हो।*# पहले मतदान, फिर जलपान।*
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सनातन धर्म
# सनातन विरोधी गुट का त्याग करने वाले महानुभावों का हार्दिक अभिनंदन, हमारे लिए सनातन से बढ़कर अन्य कुछ भी नहीं ।*
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मक्कारी
# समाज में क्षेत्र, भाषा, जाति, धर्म, ऊंच-नीच, रंग, मत, पंथ, संप्रदाय, लिंगादि भेद-भाव फैलाना और सनातनी समाज, देश, धर्म- संस्कृति को मिटाना मक्कारों की ही राजनीति है। *
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व्यवस्था
# जिस व्यवस्था में असत्य, अधर्म, अन्याय और अनीति का बोलबाला हो उसे बदल देने में ही जन, समाज और राष्ट्र का हित है।*
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प्रत्याशी
# ऐसे प्रत्याशी को वोट देने से क्या लाभ जो न तो सत्यनिष्ठ है न धर्मपरायण, न न्यायप्रिय है और न ही नीतिवान ।* सम्मान की आशा –# जो व्यक्ति या उसका विचार हमारे देश और धर्म का अपमान करता है, वह हम से अपने सम्मान की आशा कैसे कर सकता !*