जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • वेद व्यास

    विचारकों के कथन :-मनुष्य की इच्छाओं का पेट आज तक कोई नहीं भर पाया है।- वेद व्यास

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  • आचार्य चाणक्य

    विचारकों के कथन :-कुवेेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है।- आचार्य चाणक्य

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  • शेक्सपीयर

    विचारकों के कथन :-गहरी नदी का जल प्रवाह शांत व गंभीर होता है।- शेक्सपीयर

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  • क्रांति लाने हेतु

    जो भाई-बहन और नौजवान सकारात्मक सोच रखते हैं, उनसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि वे रचनात्मक कार्य करने हेतु अपने-अपने गांव या शहर में शाखाओं का गठन करें और क्षेत्र में क्रांति लाने हेतु निम्न प्रयास तेज कर कर दें।शैक्षणिक क्रांति – वैदिक पाठशाला से प्रतिभाओं का उजागर, प्रोत्साहन, संरक्षण करना।शासनिक क्रांति – स्वशासन से…

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  • मेरा गांव ‘सुल्याली’

    अठाहरवीं सदी के अंत में और उन्नीसवीं सदी के पहले दूसरे दशक में गांव सुल्याली, एक बहुत बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था। इस गांव के जाने माने धनाड्डयों में स्व0 श्री किरपा राम जी, वोटी, स्व0 भवानी शंकर जी व स्व0 श्री उग्रसेन जी, सौगुनी, स्व0 जयकरण जी पिता स्व0 श्री मुकुन्द लाल जी, चौधरी…

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    भूजल स्तर में कैसे होगी वृद्धि?

    भूजल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है। इससे भूजलस्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे।जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए, पीने के लिए  सदा गहरे हैंडपंप, नलकूप,…

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  • सशक्त जनसेवक

    15 अक्तूबर 2015 ब्रह्मभाव में स्थिर रहकर, ब्रह्मतत्व का विश्वकल्याण हेतु प्रचार-प्रसार करने वाला ब्रह्मज्ञानी, ज्ञानवीर होता है।क्षत्रियभाव में स्थिर रहकर, जन, समाज और राष्ट्र हित में जान-माल की रक्षा करने वाला, शूरवीर होता है।वैश्यभाव में स्थिर रहकर, गौसेवा, कृषि और व्यापर से जन, समाज और राष्ट्र हित में कार्य करने वाला, धर्मवीर होता है।शुद्रभाव…

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    3. स्थानीय विकास और जन सहयोग

    मातृवंदना सितम्बर 2015 सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह के प्राकृतिक एवंम सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक है l ध्यान…

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    2. छोटी – छोटी असावधानियों से भूजल स्तर जाएगा पाताल !

    मातृवंदना अगस्त 2015 पर्यावरण चेतना हमारी अनेकों समस्याएं हैं, वह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन समस्याओं में गहरा होता जा रहा भूजल का गिरता स्तर, वर्तमान में राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। हम हर क्षण राष्ट्र के अधिकांश भूजल संसाधनों का कदम-कदम पर दुरुपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप भूजल…

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    1. शोषण पर आधारित विकास सहन नहीं करती प्रकृति

    10 अगस्त 2015 पंजाब केसरी पर्यावरण चेतना  सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है, तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह प्राकृतिक एवं सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढ़ने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक…

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