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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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अति वृष्टिपात और बाढ़-संकट
मातृवंदना अगस्त 2023जल, वायु, अग्नि, धरती और आकाश सृष्टि के पंच महाभूत, सर्व विदित हैं l धरती पर वायु अग्नि और जल तत्वों की प्रतिशत मात्रा जब कभी कम या अधिक हो जाती है तब उस पर असंतुलन पैदा हो जाता है l वायु का दबाव कम या अधिक होने पर आंधी या तूफ़ान आने…
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स्टार्ट अप कंपनियां दे रही रोजगार के अवसर
आलेख – साक्षात्कार मातृवन्दना जुलाई 2023आलस्य, निद्रा, कर्महीनता और नशा मनुष्य जीवन के महान शत्रु हैं l जहाँ एक ओर आज का एक युवावर्ग इन शत्रुओं का शिकार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर एक अन्य पुरुषार्थी और कर्मठ युवा वर्ग दिन-रात एक करके अपने कार्य में निरंतर प्रयत्नशील भी है l आज मुझे एक…
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मतदान के प्रति मतदाता की जागरूकता
मातृवंदना नवंबर 2022जागरूक मतदाता :-जो मतदाता भारत का नागरिक हो l जो आचार संहिता लगने तक संपूर्ण 18 वर्ष का हो गया हो l जो उस निर्वाचन क्षेत्र का निवासी हो जहाँ उसका पहली बार नाम अंकित होना हो, मतदान की योग्यता रखता है l लोक तांत्रिक देश भारत में 18 वर्ष से ऊपर के…
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नियामक जीवन
साधारण जीवन दुर्बल है, नियामक सर्व शक्तिमान l जटिल समस्या समाधान करे, मनः तू भेद अमोल पहचान ll
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मेहमान न बन
मेहमान न बन तू किसीका, रोजाना न कर तू आना जाना l मेहमान तू रहेगा नहीं, मनः बहुतों ने तो कुत्ता माना ll
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चाहे चन्दन डालो
चाहे चन्दन डालो, चाहे सादा इंधन, बस देह का संस्कार होगा l अमीर-गरीब का भेद यहाँ, मनः आगे हिसाब कर्म का होगा ll
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खोखला ढोल
खोखला ढोल ढम-ढम करता, गाना तो वह गा नहीं सकता l तू शोर धर्म का करता, मनः जब उस पर चल नहीं सकता ll