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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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क्रांति लाने हेतु
जो भाई-बहन और नौजवान सकारात्मक सोच रखते हैं, उनसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि वे रचनात्मक कार्य करने हेतु अपने-अपने गांव या शहर में शाखाओं का गठन करें और क्षेत्र में क्रांति लाने हेतु निम्न प्रयास तेज कर कर दें।शैक्षणिक क्रांति – वैदिक पाठशाला से प्रतिभाओं का उजागर, प्रोत्साहन, संरक्षण करना।शासनिक क्रांति – स्वशासन से…
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मेरा गांव ‘सुल्याली’
अठाहरवीं सदी के अंत में और उन्नीसवीं सदी के पहले दूसरे दशक में गांव सुल्याली, एक बहुत बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था। इस गांव के जाने माने धनाड्डयों में स्व0 श्री किरपा राम जी, वोटी, स्व0 भवानी शंकर जी व स्व0 श्री उग्रसेन जी, सौगुनी, स्व0 जयकरण जी पिता स्व0 श्री मुकुन्द लाल जी, चौधरी…
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भूजल स्तर में कैसे होगी वृद्धि?
भूजल स्तर में आ रही निरंतर गिरावट को जल का सदुपयोग करने से रोका जा सकता है। इससे भूजलस्तर की पुनः वृद्धि हो सकती है इसके लिए हमें आज ही से निरंतर जागरूक रहकर स्वयं कुछ प्रयास करने होंगे।जब भी पानी पीना हो, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए, पीने के लिए सदा गहरे हैंडपंप, नलकूप,…
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सशक्त जनसेवक
15 अक्तूबर 2015 ब्रह्मभाव में स्थिर रहकर, ब्रह्मतत्व का विश्वकल्याण हेतु प्रचार-प्रसार करने वाला ब्रह्मज्ञानी, ज्ञानवीर होता है।क्षत्रियभाव में स्थिर रहकर, जन, समाज और राष्ट्र हित में जान-माल की रक्षा करने वाला, शूरवीर होता है।वैश्यभाव में स्थिर रहकर, गौसेवा, कृषि और व्यापर से जन, समाज और राष्ट्र हित में कार्य करने वाला, धर्मवीर होता है।शुद्रभाव…
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3. स्थानीय विकास और जन सहयोग
मातृवंदना सितम्बर 2015 सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह के प्राकृतिक एवंम सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक है l ध्यान…
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2. छोटी – छोटी असावधानियों से भूजल स्तर जाएगा पाताल !
मातृवंदना अगस्त 2015 पर्यावरण चेतना हमारी अनेकों समस्याएं हैं, वह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन समस्याओं में गहरा होता जा रहा भूजल का गिरता स्तर, वर्तमान में राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। हम हर क्षण राष्ट्र के अधिकांश भूजल संसाधनों का कदम-कदम पर दुरुपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप भूजल…
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1. शोषण पर आधारित विकास सहन नहीं करती प्रकृति
10 अगस्त 2015 पंजाब केसरी पर्यावरण चेतना सेवा के नाम पर मानव जहाँ एक ओर समाज का विकास करता है, तो दूसरी ओर जाने-अनजाने में उससे तरह-तरह प्राकृतिक एवं सामाजिक अपराध व शोषण भी हो जाते हैं l देखने, पढ़ने और सुनने में समस्या गंभीर है पर जटिल नहीं l समाज का विकास होना आवश्यक…
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1. सनातन धर्म एवं संस्कृति
अप्रैल मई 2015 मातृवंदनासभी कष्ट दूर हो जाते हैं l कोई समस्या शेष नहीं रहती है l विपदाओं का भी शमन हो जाता है l इसके लिए मनुष्य को सत्सनातन-धर्म का अनुसरण करना पड़ता है l वह धर्म मुख्यतः तीन बातों पर आधारित है – सत्य, सनातन और धर्म l परम पिता परमात्मा विशाल दिव्य…
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1. देश हमारा
मातृवन्दना सितम्बर 2014 जन-जन का देख भाई चारा,विश्व हुआ हैरान हैदवी जुवान से प्रसंशा करता,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम——— वन्दे मातरमतरह तरह के फूल इसके,फूलदान में सब एक हैंसुगंध फैलाते चहुं ओर अपनी,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम————–वन्दे मातरमखेलना इन्हें पसंद तूफानों से,खुदको मिटा देना शान सेआन बान शान बनाए रखना,भारत की पहचान हैवन्दे मातरम———- वन्दे मातरमबुरी…
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2. राम-राज्य कैसे हो साकार?
राष्ट्रीय भावना मातृवन्दना मार्च-अप्रैल 2014 प्राचीन काल से ही भारत भूमि ऋषि-मुनियों की तपो भूमि रही है। यह सब उन्हीं के तप का प्रतिफल है कि भारतवर्ष विश्व के मानचित्र पर आर्यवर्त के नाम से सर्व विख्यात हुआ। समय की मांग के अनुसार उसमें वेद, भाष्य, ऋचाएं, रामायण और गीता जैसे अन्य अनेकों धर्म-ग्रंथों की…