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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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बेंजामिन फ्रैंकलिन
विचारकों के कथन :-अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है, जितना सीखने की इच्छा का न होना।- बेंजामिन फ्रैंकलिन
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लाल बहादुर शास्त्री
विचारकों के कथन :-हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं । – लाल बहादुर शास्त्री
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अब्राहम लिंकन
विचारकों के कथन :-मैं उस व्यक्ति को पसंद करता हूं जो उस स्थान पर गर्व करता है, जहां वह रहता है। मैं उस व्यक्ति को देखना और पसंद करुंगा जिस पर उसके रहने का स्थान गर्व करे।- अब्राहम लिंकन
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आचार्य श्रीराम शर्मा
विचारकों के कथन :-संपदा जोड़-जोड़ रखने वाले को भला क्या पता कि दान में कितनी मिठास है।- आचार्य श्रीराम शर्मा
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मुंशी प्रेमचंद
विचारकों के कथन :-अच्छे कामों की सिद्धि में बड़ी देर लगती है। पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं।- मुंशी प्रेमचंद
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श्री मद्भगवत गीता
विचारकों के कथन :-जन्म के बाद मृत्यु, उत्थान के बाद पतन, संयोग के बाद वियोग और संचय के बाद क्षय निश्चित है। ज्ञानीजन इन बातों का ज्ञान करके हर्ष या शोक के वशीभूत नहीं होते।- श्री मद्भगवत गीता
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आचार्य चाणक्य
विचारकों के कथन :-कुवेेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है।- आचार्य चाणक्य