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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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शिक्षा से विश्व का चहुंमुखी विकास
शिक्षा मानव जीवन का आधार है। यह एकमात्र अध्ययन-लिखना शिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति के ज्ञान, विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का विकास करने वाली शक्ति है। किसी भी देश और विश्व की प्रगति का मुख्य आधार शिक्षा ही है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है।सबसे पहले,…
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3. जल संग्रहण और उसकी उपयोगिता
जनवरी 2020 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 4 हर स्थान पर नहरें व समयानुकूल वर्षा न होने से एकमात्र नलकूप ही खेतों की सिंचाई करने के संसाधन होते हैं l खेतों की सिंचाई करने हेतु नलकूपों की आवश्यकता पड़ती है l उनसे सिंचाई की जाती है l आवश्यक है, भूजल दोहन नियमित और फसल की आवश्यकता…
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7. गुरु का महत्व
आलेख – शिक्षा दर्पण मातृवंदना नवंबर 2019भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरी है l घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है l शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है l “मातृदेवो भवः, पितृ देवो भवः, गुरु देवो भवः l गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है…
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6. ख़ुशी का पर्व – दीपावली
अक्तूबर 2019 मातृवन्दना भारत वर्ष विभिन्न – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुओं का देश है l वर्षा ऋतु के अंत में जैसे ही शरद ऋतु का आरम्भ होता है उसके साथ ही नवरात्रि – दुर्गा पूजन और राम लीला मंचन भी एक साथ आरम्भ हो जाते हैं l दुर्गा पूजन एवं राम…
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5. अनुच्छेद 370 तब और अब
आलेख – राष्ट्रीय भावना – मातृवंदनासितम्बर 2019 भारत को स्वतंत्रता मिलने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को जम्मू-कश्मीर भी स्वतंत्र हो गया था l उस समय यहाँ के शासक महाराजा हरि सिंह अपने प्रान्त को स्वतंत्र राज्य बनाये रखना चाहते थे l लेकिन 20 अक्तूबर 1947 को कबालियों ने पकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर…
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4. जल संकट और उसका समाधान
अगस्त 2019 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 3भारत पाक विभाजन के पश्चात् बंगलादेशी और रोहिंग्या शरणार्थी मुसलमानों का भारत में तेजी के साथ आगमन हुआ है l मुसलमानों में बहु विवाह करने, अनेकों पत्नियाँ रखने और हर पत्नी से दर्जनों बच्चे पैदा करने की परंपरा, का आज भी प्रचलन जारी है l इस कारण छह-सात दशकों…
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3. गुरुकुल शिक्षा पद्दति और संस्कार
आलेख – परम्परागत गुरुकुल शिक्षा मातृवन्दना जुलाई 2019प्राचीन भारतीय निशुल्क शिक्षा-प्रणाली अपने आप में विशाल हृदयी होने के कारण विश्वभर में जानी और पहचानी गई थी l भारत विश्वगुरु कहलाया था l भारतीय शिक्षा गुरुकुल परंपरा पर आधारित थी जिसमे सहयोग, सहभोज, सत्संग, लोकानुदान की पवित्र भावना, सद्विचार, सत्कर्मों से विश्व का कल्याण होता था…
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2. अपने प्रति अपनी सजगता
मातृवन्दना मई 2019 मानव मन जो उसे नीच कर्म करने से रोकता है, विपदा आने से पूर्व सावधान भी करता है, वह स्वयं बड़े रहस्यमय ढंग से एक ऐसे आवरण में छुपा रहता है जिसके चारों ओर विषय, वासना और विकार रूपी एक के पश्चात् एक पहली, दूसरी तीसरी और चौथी परत के पश्चात् परत…
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1. आइये ! राष्ट्रभाव की जोत जगाएं
आलेख – मातृवंदना मार्च अप्रैल 2019 हम भारतवासी भारत के नागरिक हैं तो हमारा यह भी दायित्व बन जाता है कि हम देशहित में ही कार्य करें l हम जो भी कार्य कर रहे हैं, देश हित में कर रहे हैं l इस सोच के साथ हर कार्य करने से देश का विकास होना निश्चित…
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1. साधक आत्मोवाच
मातृवन्दना दिसम्बर 2018 रख सके तो याद रख है तेरा पांच तत्व का शरीर – रथ जहाँ ले जाना चाहे इसको हांके ले जा, हो के मस्त हैं नामी बलवान बहुत इसके दस इन्द्रिय घोड़े जब भी बे-लगाम हो जाये कोई दिशा छोड़ विषय रसास्वादन हेतु दौड़े शत्रु हैं भयानक अहं, मोह, लोभ,…
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2. भारत का भविष्य
मातृवंदना अक्तूबर 2018 आश्चर्य है कि सनातन धर्म अति प्राचीन होने पर भी संपूर्ण संसार में आज तक हिन्दुओं का अपना कहीं एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है, परन्तु धर्म से प्रेरित मुट्ठीभर लुटेरे, आतंकवादियों ने मात्र डेढ़ दो हजार वर्षों में ही धर्म के नाम पर छप्पन मुस्लिम देश और अस्सी ईसाई देश ही…