जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



नवीन लेख

विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।

  • 5. “षड्यंत्र” बार-बार लेकिन “पलटवार” एक बार !

    मातृवंदना दिसंबर 2021सनातन धर्म की कालगणना के अंतर्गत सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग चार युग माने गए हैं l हर युग में धर्मी और अधर्मी लोग होते हैं l इतिहास साक्षी है कि सृष्टि में जब–जब अधर्म की वृद्धि और धर्म की हानि हुई है, तब-तब धर्म की रक्षा करने हेतु किसी न किसी महान…

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  • 4. संतुलित विकास की आवश्यकता

    मातृवंदना अक्तूबर 2021 पर्यावरण चेतना – 10जैसे-जैसे पृथ्वी पर जनसंख्या बढ़ रही है – धरती पर प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अनवरत दोहन में भी वृद्धि हो रही है l इस प्रकार प्राकृतिक असंतुलन बढ़ने के कारण वो दिन दूर नहीं जब मनुष्य को पृथ्वी पर पीने हेतु जल और रहने का स्थान शेष नहीं रहेगा…

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  • 3. कल्याणकारी वैदिक चिंतन – धारा

    आलेख – शिक्षा दर्पण मातृवंदना सितंबर 2021 बहुत समय पूर्व भारत आर्यों का देश “आर्यवर्त” था l हमारे पूर्वज आर्य (श्रेष्ठ) थे l सन्यासी जन वेद सम्मत कार्य करते थे l वे गृहस्थियों के कल्याणार्थ वेद-वाणी सुनाते थे l हम सब भारतवासी आर्य वंशज, आर्य हैं l ब्रह्मज्ञान, पराक्रम, मानवता प्रेम और पुरुषार्थ भारत को…

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  • 2. मान्य हो अखंड भारत

    मातृवन्दना अगस्त 2021 क्या कभी एक देश के चार नाम आर्यावर्त, भारत वर्ष, हिंदुस्तान और इण्डिया हैं? नहीं ना, पर उन नामों पर राजनीति क्यों हो रही है, कभी सोचा अपने? हमारे राष्ट्र का पुरातन नाम आर्यावर्त था l सतयुग, त्रेता, द्वापर तक हम सब मात्र आर्य (श्रेष्ठ) कहलाए l आर्यों में हर समय एक…

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  • 1. “प्रत्याशी” जीतने की चाह !

    फरवरी 2021 मातृवंदना सामाजिक जन चेतना – 10 भारत लोकतान्त्रिक देश में 18 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के द्वारा किसी भी प्रत्याशी को अपना मतदान करने का अधिकार प्राप्त है l चुनाव काल में मतदाता देश में अपनी पसंद के प्रत्याशी को अपना अमूल्य मतदान करके उसे चुनाव में विजय दिलाने का भरसक…

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  • 7. लाकडाउन पर भारी निस्वार्थ सेवा

    नवंबर 2020 मातृवंदना  सामाजिक जन चेतना – 13 वैश्विक कोविड-19 संक्रमण का प्रादुर्भाव कब और कहाँ हुआ ? यह महत्व पूर्ण नहीं है l इसे नियंत्रित कैसे किया जा सकता है ? यह ज्यादा महत्वपूर्ण है l जब से भारत कोविड-19 संक्रमण की पाश से बंधा है तब से भारत सरकार देशवासियों को अविलम्ब जागरूक…

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  • 5. जिंदगी से कला जोड़ो, नशा नहीं

    अक्तूबर 2020 मातृवंदना मानव जीवन दर्शन – 5 जीना भी एक कला है। जो युवा कलात्मक विधि से जीना सीख जाता है, वह मानों उसके लिए सोने पर सुहागा। कलात्मक विधि से जीने के लिए युवा का किसी न किसी कला के साथ जुड़े रहना अति अवश्यक है। इसके लिए युवा को मांस-मदिरा सेवन और…

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  • 4. आतताई नहीं, मानवतावादी बनो

    आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2020 “मनु व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप” लेख में डा० बीसी चौहान ने लिखा है l मनुस्मृति के अध्याय 3 के श्लोक 167 और 168 के अनुसार – चारों वर्णों के पितर वैदिक ऋषि थे l ब्राह्मण वर्ण के पितर भृगु ऋषि के पुत्र सोम थे l क्षत्रिय अंगीरा ऋषि…

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  • 2. कला – साधना जीवनोपयोगी है

    आलेख – मातृवन्दना जुलाई अगस्त 2020 जीना भी एक कला है l जो व्यक्ति भली प्रकार जीना सीख जाता है, वह मानों उसके लिए सोने पर सुहागा l भली प्रकार जीने के लिए व्यक्ति का किसी न किसी कला के साथ जुड़े रहना अति आवश्यक है भी l मनुष्य को मांस-मदिर और धुम्रपान से सदैव…

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  • 1. डिह्बकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में समरसता

    आलेख – धर्म संस्कृति मातृवन्दना मार्च अप्रैल 2020 ऋषि-मुनि, सिद्ध, सन्यासी, साधु-सन्त, महात्मा और परमात्मा के साथ जुड़े माणिकों एवं अलंकारों से सुशोभित, भारत माता के सरताज, देव और वीरभूमि हिमाचल प्रदेश की तराई में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है जिला कांगड़ा, का प्रवेश द्वार नूरपुर, के उत्तर में सहादराबान से सर्पाकार एवं घुमावदार सड़क…

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