दिनांक 26 जनवरी 2026
# संविधान में समानता का अधिकार है तो समाज में भेद-भाव, ऊँच-नीच क्यों है ?*
असमानता – संविधान में समानता का अधिकार होते हुए भी समाज में भेद-भाव क्यों?
1. संविधान क्या कहता है? -
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 से 18 नागरिकों को समानता का अधिकार देता है।
इनमें प्रमुख बातें हैं -
कानून के समक्ष समानता, धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेद-भाव निषिद्ध, छुआछूत का अंत (अनुच्छेद 17), उपाधियों का उन्मूलन यानी काग़ज़ पर सभी नागरिक बराबर हैं।
2. फिर समाज में भेद-भाव क्यों है? -
(क) ऐतिहासिक कारण - भारत में जाति-प्रथा हजारों वर्षों से चली आ रही है l ऊँच-नीच की सोच पीढ़ी दर पीढ़ी चली आई है l संविधान को बने हुए अभी 75 साल ही हुए हैं, लेकिन सामाजिक कुरीतियाँ हज़ारों साल पुरानी हैं l कानून एक दिन में बन सकता है, मानसिकता नहीं बदलती l
(ख) सामाजिक मानसिकता - कई लोग आज भी जाति, रंग, लिंग, भाषा को श्रेष्ठ-हीन मानते हैं l शादी, दोस्ती, नौकरी में भेद-भाव देखा जाता है l “हम” और “वे” वाली सोच l जब तक सोच नहीं बदलेगी, कानून अकेला कमजोर पड़ जाता है l
(ग) आर्थिक असमानता - गरीबी और अमीरी का बड़ा अंतर l शिक्षा और अवसर सबको समान नहीं l आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति अक्सर सामाजिक रूप से भी कमजोर माना जाता है l धन बल और बल से असमानता बढ़ती है l
(घ) शिक्षा की कमी - शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक सोच भी सिखाती है l अशिक्षा या अधूरी शिक्षा भेद-भाव को जन्म देती है l
(ङ) कानून का कमजोर क्रियान्वयन - कई बार कानून सही है, पर लागू ठीक से नहीं होता l पीड़ित को न्याय मिलने में देर l प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं l “कानून है” और “कानून चलता है” – दोनों अलग बातें हैं l
3. क्या संविधान असफल है? – नहीं, बिल्कुल नहीं। संविधान ने -आवाज़ दी, अधिकार दिए, सुधार का रास्ता दिखाया लेकिन समाज को चलाना केवल संविधान का काम नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।
4. समाधान क्या है? -
शिक्षा - समानता और मानवता आधारित शिक्षा, बच्चों में शुरू से ही भेद-भाव विरोधी सोच
सामाजिक जागरूकता - संवाद, बहस, साहित्य, मीडिया की भूमिका, गलत परंपराओं को चुनौती देना l
कानून का सख्त पालन - भेद-भाव पर जीरो टॉलरेंस, त्वरित न्याय,
व्यक्तिगत बदलाव - “अगर मैं बदलूँ, तो समाज बदले” अतः संविधान ने हमें समानता का अधिकार दिया, लेकिन समानता को जीना हमें सीखना होगा। कानून समानता देता है, समाज उसे अपनाता है।
- संकलित
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