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विचार, संस्कृति, परिवार, समाज और जीवन-दर्शन पर चयनित लेख।
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मैं और मेरा बहुमूल्य मतदान
विश्व के दूसरे महा लोकतांत्रिक प्रभुत्व संपन्न राष्ट्र भारत वर्ष के राज्य हिमाचल प्रदेश में स0 2027 में “विधान सभा” का चुनाव होना निश्चित है l इसके साथ ही साथ उसके विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी विधान सभा का चुनाव लड़ने का अपना मन बना लिया है, कमर कस ली है l वे अपने-अपने क्षेत्रों…
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मानव
प्राणी जातियां – विश्वभर में विभिन्न प्राणियों की अनेकों जातियां पाई जाती हैं l उन जातियों में मानव भी एक जाति है जो अन्य प्राणियों से भिन्न है – दो हाथ, दो पैर, मुंह, नाक, कान, आँखें अर्थात वह पांच कर्मेन्द्रियाँ पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, अहंकार का स्वामी है l जैसे गाये को भैंस और…
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गुरु – आचार्य
– # विद्यार्थी को तराशकर एक योग्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कोई बना सकता है तो वह गुरु ही हो सकता है l* – दूषित राजनीति से छुटकारा दिलाने हेतु चाणक्य जैसे आचार्यों को, चन्द्र गुप्त मौर्य जैसे विद्यार्थियों के साथ, आगे अवश्य आना पड़ता है l – जब जब चाणक्य जैसा कोई आचार्य…
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विद्याओं में पारंगता
# अगर हम जीवन चुनौतियों का सामना करने में शास्त्र – शस्त्र विद्याओं में पारंगत नहीं हुए तो एक दिन विधर्मियों द्वारा बांस की भांति छिल दिए जायेंगे l*
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सशक्त व्यक्ति
जीवन लक्ष्य –जीवन लक्ष्य की प्राप्ति, चुनौतियों का सामना किये बिना संभव नहीं lजीवन सार –जीवन – सार सबकी समझ में आने वाली वस्तु नहीं है l वह सत्य है और ये झूठ l वह दिन है और ये रात l
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एकाकी परिवार
परंपरागत संयुक्त परिवार से वर्तमान एकाकी परिवार बहुत भिन्न हैं । इनमें मात्र माता – पिता और नौकर – चाकर ही होते हैं । पिता नौकरी करता है और माता घर का सब कार्य करती है या दोनों ही नौकरी करने बहार जाते हैं । अगर वे दोनों नौकरी करते हों तो घर और बच्चे…
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संयुक्त परिवार
विश्व भर में अन्य सभ्यताओं की अपेक्षा मात्र सत्सनातन समाज ही एक ऐसा समाज है जिसकी दृष्टि से देखने पर मातृ – पक्ष में नानी – नाना, मामी – मामा, मासी – मासड़ मिलते हैं जबकि पितृ – पक्ष में पति-पत्नी, बेटी – बेटा, दादी – दादा, चाची – चाचा, ताई – ताया, बुआ -…