श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
7. गुरु का महत्व
आलेख – शिक्षा दर्पण मातृवंदना नवंबर 2019भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरी है l घर पर माता-पिता और विद्यालय में गुरु को उच्च स्थान प्राप्त है l शास्त्रों में इन तीनों को गुरु कहा गया है l “मातृदेवो भवः, पितृ देवो भवः, गुरु देवो भवः l गुरु माता को सर्व प्रथम स्थान प्राप्त है…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
6. ख़ुशी का पर्व – दीपावली
अक्तूबर 2019 मातृवन्दना भारत वर्ष विभिन्न – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुओं का देश है l वर्षा ऋतु के अंत में जैसे ही शरद ऋतु का आरम्भ होता है उसके साथ ही नवरात्रि – दुर्गा पूजन और राम लीला मंचन भी एक साथ आरम्भ हो जाते हैं l दुर्गा पूजन एवं राम…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
5. अनुच्छेद 370 तब और अब
आलेख – राष्ट्रीय भावना – मातृवंदनासितम्बर 2019 भारत को स्वतंत्रता मिलने के पश्चात 15 अगस्त 1947 को जम्मू-कश्मीर भी स्वतंत्र हो गया था l उस समय यहाँ के शासक महाराजा हरि सिंह अपने प्रान्त को स्वतंत्र राज्य बनाये रखना चाहते थे l लेकिन 20 अक्तूबर 1947 को कबालियों ने पकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
4. जल संकट और उसका समाधान
अगस्त 2019 मातृवंदना पर्यावरण चेतना – 3भारत पाक विभाजन के पश्चात् बंगलादेशी और रोहिंग्या शरणार्थी मुसलमानों का भारत में तेजी के साथ आगमन हुआ है l मुसलमानों में बहु विवाह करने, अनेकों पत्नियाँ रखने और हर पत्नी से दर्जनों बच्चे पैदा करने की परंपरा, का आज भी प्रचलन जारी है l इस कारण छह-सात दशकों…
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श्रेणी: मातृवंदना शिमला
3. गुरुकुल शिक्षा पद्दति और संस्कार
आलेख – परम्परागत गुरुकुल शिक्षा मातृवन्दना जुलाई 2019प्राचीन भारतीय निशुल्क शिक्षा-प्रणाली अपने आप में विशाल हृदयी होने के कारण विश्वभर में जानी और पहचानी गई थी l भारत विश्वगुरु कहलाया था l भारतीय शिक्षा गुरुकुल परंपरा पर आधारित थी जिसमे सहयोग, सहभोज, सत्संग, लोकानुदान की पवित्र भावना, सद्विचार, सत्कर्मों से विश्व का कल्याण होता था…