जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    4. संतुलित विकास की आवश्यकता

    मातृवंदना अक्तूबर 2021 पर्यावरण चेतना – 10जैसे-जैसे पृथ्वी पर जनसंख्या बढ़ रही है – धरती पर प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अनवरत दोहन में भी वृद्धि हो रही है l इस प्रकार प्राकृतिक असंतुलन बढ़ने के कारण वो दिन दूर नहीं जब मनुष्य को पृथ्वी पर पीने हेतु जल और रहने का स्थान शेष नहीं रहेगा…

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    3. कल्याणकारी वैदिक चिंतन – धारा

    आलेख – शिक्षा दर्पण मातृवंदना सितंबर 2021 बहुत समय पूर्व भारत आर्यों का देश “आर्यवर्त” था l हमारे पूर्वज आर्य (श्रेष्ठ) थे l सन्यासी जन वेद सम्मत कार्य करते थे l वे गृहस्थियों के कल्याणार्थ वेद-वाणी सुनाते थे l हम सब भारतवासी आर्य वंशज, आर्य हैं l ब्रह्मज्ञान, पराक्रम, मानवता प्रेम और पुरुषार्थ भारत को…

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    2. मान्य हो अखंड भारत

    मातृवन्दना अगस्त 2021 क्या कभी एक देश के चार नाम आर्यावर्त, भारत वर्ष, हिंदुस्तान और इण्डिया हैं? नहीं ना, पर उन नामों पर राजनीति क्यों हो रही है, कभी सोचा अपने? हमारे राष्ट्र का पुरातन नाम आर्यावर्त था l सतयुग, त्रेता, द्वापर तक हम सब मात्र आर्य (श्रेष्ठ) कहलाए l आर्यों में हर समय एक…

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    1. “प्रत्याशी” जीतने की चाह !

    फरवरी 2021 मातृवंदना सामाजिक जन चेतना – 10 भारत लोकतान्त्रिक देश में 18 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के द्वारा किसी भी प्रत्याशी को अपना मतदान करने का अधिकार प्राप्त है l चुनाव काल में मतदाता देश में अपनी पसंद के प्रत्याशी को अपना अमूल्य मतदान करके उसे चुनाव में विजय दिलाने का भरसक…

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    7. लाकडाउन पर भारी निस्वार्थ सेवा

    नवंबर 2020 मातृवंदना  सामाजिक जन चेतना – 13 वैश्विक कोविड-19 संक्रमण का प्रादुर्भाव कब और कहाँ हुआ ? यह महत्व पूर्ण नहीं है l इसे नियंत्रित कैसे किया जा सकता है ? यह ज्यादा महत्वपूर्ण है l जब से भारत कोविड-19 संक्रमण की पाश से बंधा है तब से भारत सरकार देशवासियों को अविलम्ब जागरूक…

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