श्रेणी: विभिन्न पत्रिकाएं
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3. सार्थक दीपावली
26 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्सनगर देखो! सबने दीप जलाए हैं द्वार-द्वार पर,घर आने की तेरी ख़ुशी में मेरे राम!तुम आओगे कब? मेरे मन मंदिर,अँधेरा मिटाने मेरे राम!आशा और तृष्णा ने घेरा है मुझको,स्वार्थ और घृणा ने दबोचा है मुझको,सीता को मुक्ति दिलाने वाले राम!विकारों की पाश काटने वाले राम !दीप बनकर मैं जलना चाहूँ,दीप तो…
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5. हमारी हिन्दी भाषा
12 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्सयह सत्य है कि हमारे देश के लोग, उनका रहन-सहन, खान-पान, आचार-व्यवहार, राष्टीय भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उत्पादन से देश की सभ्यता और संस्कृति को बल मिलता है। उससे भारत की पहचान होती है। अगर कभी इसमें विद्यमान गुण व दोषों को समाज के सम्मुख अलिखित रूप में व्यक्त करना पड़े…
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2. राजभाषा हिंदी
5 अक्तूबर 2008 कश्मीर टाइम्समेरे मन भाया तेरा विचार, भाषा हिंदी,इसकी लिपि बनी भाषा उसकी, भाषा हिंदी,हिन्द की संम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी,फोन कन्याकुमारी से पहुंचता कश्मीर, भाषा हिंदी,फैक्स गुजरात से पहुंचती आसाम, भाषा हिंदी,हिन्द की संम्पर्क भाषा, भाषा हिंदी,हर व्यक्ति की सांस, हिन्द की धड़कन, भाषा हिंदी,हर स्थान की बोली, हिन्द की पहचान, भाषा हिंदी,हिन्द…
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4. और लम्बी होंगी बेरोजगार की शृंखलाएं
आलेख – सामाजिक चेतना मातृवन्दना सितम्बर 2008भारत में औद्योगिक क्रांति आने के पश्चात्, कल-कारखानों और मशीनों के बढ़ते साम्राज्य से असंख्य स्नातक, बेरोजगार की श्रृंखलाओं में खड़े नजर आने लगे हैं l उनके हाथों का कार्य कल-कारखाने और मशीनें ले चुकीं हैं l वह कठोर शरीर-श्रम करने के स्थान पर भौतिक सुख व आराम की…
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4. राष्ट्र -हित कितना बौना!
28 सितम्बर 2008 कश्मीर टाइम्सकिसी व्यक्ति का-अपना परिवार, परिवार का-समाज, समाज का-क्षेत्र, क्षेत्र का-राज्य, राज्य का-राष्ट्र, और राष्ट्र का-विश्व पूरक होता है। वे सब एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। इन्हें स्वयं के निर्वहन हेतु आपस में मधुर संबंध और सामंजस्य बनाए रखना अति आवश्यक है।व्यक्ति से लेकर परिवार, समाज, क्षेत्र, राज्य और राष्ट्र को…