जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



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    1. भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक

    नवम्बर 2009 मातृवन्दनायह बात सर्व विदित है कि भारत ऋषि   मुनियों का देश  रहा है। मनीषियों  ने मानव जीवन को मुख्यता चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यासाश्रमों के अपने विशेष  सिद्धांत थे।, उच्च आदर्श   थे। उनके अनुसार मनुष्य  अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन यापन करता हुआ अपार शक्तियों का स्वामी बन जाता था। भारत…

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    8. आदर्श समाज की कल्पना

    6 सितम्बर 2009  दैनिक कश्मीर टाइम्स सामाजिक जन चेतना आओ हम ऊँच-नीच का भेद मिटायें, सब समान हैं, चहुँ ओर संदेश फैलायें l भारतीय समाज में कोई जाति से बड़ा है तो कोई धर्म से, कोई पद से ऊँचा है तो कोई धनबल से l प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा पहले भी होता था…

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    7. पालीथीन प्रतिबंधित हुआ, परन्तु —

    12 जुलाई 2009 कश्मीर टाइम्स पर्यावरण चेतना हिमाचल सरकार पालीथीन पर प्रतिबंध लगा चुकी है l जम्मू कश्मीर सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया है l इन प्रांतीय सरकारों का यह कार्य प्रयास चहुँ ओर प्रशंसनीय रहा है l अब इन प्रान्तों के शहर व गाँव की गलियों व नालियों पालीथीन लिफ़ाफ़े तो कम…

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    6. भारतीय शिक्षा-प्रणाली

    28 जून 2009 कश्मीर टाइम्सप्रिय होने के नाते आदि काल से ही भारतवर्ष  महान पुरुषों  का देश  रहा है। उनमें श्री राम, श्री कृष्ण , गुरु नानक देव, आदि गुरु शंकराचार्य, स्वामी विवेकानन्द जी का नाम सर्वोपरि है।इन महान पुरुषों के जीवन चरित्रों का अध्ययन, चिन्तन-मनन करने से हमें अनेकों ऐसे दीप्त ज्ञान-स्तंभ दिखाई देते हैं जिनके प्रकाश …

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    5. दिल प्रीतम का घर है

    19 अप्रैल 2009 दैनिक कश्मीर टाइम्समहात्मा गांधी जी का कथन है कि जिस तरह हमें अपना शरीर कायम रखने के लिए भोजन जरूरी है, आत्मा की भलाई के लिए प्रार्थना कहीं उससे भी ज्यादा जरूरी है। प्रार्थना या भजन जीभ से नहीं वरन हृदय से होता है। इसलिए गूंगे , तुतले और मूढ़ भी प्रार्थना कर…

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