जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



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    4. ठगी का नया दौर !

    मातृवंदना सितंबर 2011 सामाजिक जन चेतना जहाँ भारत को जिस तेजी के साथ विश्व की भावी आर्थिक शक्ति माना जाने लगा है, उससे भी तीव्र गति से देश में सक्रिय कुछ देशी, विदेशी अंतर्राष्ट्रीय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनके एजेंटों की अनैतिक गति विधियों के द्वारा लोगों की जेबों में दिन – दिहाड़े डाका भी…

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    3. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा – प्रणाली

    जुलाई 2011 मातृवंदनाहिमाचल की मासिक पत्रिका मातृवंदना अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित लेख “मैकाले की सोच-1835 ई0 में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है। इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है। ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकाॅर्ड में सुरक्षित है। लाॅर्ड मैकाले को भारत में तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लाॅर्ड…

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    2. शिक्षा और अध्यात्म ने जोड़ा है बिखरा समाज

    मातृवंदना अप्रैल 2011 सत्य ब्रह्म है और ब्रह्म ही सत्य है l ऐसा वेद कहते हैं l वेद भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के दिव्य आधार स्तंभ रहे हैं जो सदियों से मानव जाति में सत्य, कर्म, धर्म और शौर्यता का संचार करते आये हैं l हमारे पूर्वज आर्य थे l आर्य सत्यप्रिय, कर्मनिष्ठ, धार्मिक और…

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    2. विश्व दर्पण में भारतीय संस्कृति

    फरवरी 2011 मातृवंदनाप्राचीन भारत वर्ष विश्व मानचित्र पर आर्यावर्त देश रहा है l आर्य वेदों को मानते थे l वे अपने सब कार्य वेद सम्मत करते थे l वेद जो देव वाणी पर आधारित है, उन्हें ऋषि मुनियों द्वारा श्रव्य एवम् लिपिवद्ध किया हुआ माना जाता है l वेदों में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद अथर्वेद प्रमुख…

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    1. सनातन है जीने की कला !

    15 जनवरी 2011 कश्मीर टाइम्सकिसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित है परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए…

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