श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
प्रेम
बिना दर्द के जो होता है, वह होता है प्रेम नहीं lदर्द नहीं होता जिसमें, मनः होता है वह प्रेम नहीं ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
फ़कीर
राजा से फकीर अच्छा, दिलों पर राज करता है lदुःख में रहता है राजा, मनः जन, धन पर राज करता ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
बुरे दिन
गीदड़ की मौत आती है, उसे गाँव की राह भाती है lबुरे दिन आते हैं, मनः बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जीना-मरना
गिरती बूंद नदी में बह जाती है संग जलधार lजीना-मरना खेल है, मनः नहीं जीत, यहाँ न किसी की हार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
दिल से दिल
रात काली कट जाती है, सूर्य ले आता है सवेरा lदिल से दिल मिलता है, मनः छंट जाता है गम का अन्धेरा ll