श्रेणी: विविधा
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
श्रेष्ठ साहित्य
श्रेष्ठ साहित्य है कामधेनु, दूध सम देता है शक्ति l ज्ञानी की बात छोड़ो, मनः मुर्ख भी करने लगता है भक्ति l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मदिरा
नहीं रहता माँ, बहन, बेटी पत्नी का भेद वहां lमदिरा का चलता है मनः दौर खुले आम जहाँ ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
मानसिक विकार
काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, अहंकार हैं सब नर्क के द्वार lइधर कहते हैं संत प्यारे, मनः उधर बताते हैं गुरुद्वार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
संतान
वह संतान अच्छी है, जो पावों पर अपने खड़ी है lकर्तव्य अपना समझती है, मनः समाज की सच्ची कड़ी है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सहारा
सहारा होता है जो बेसहारों का, वह दर्द हर लेता है lजहर नदी, नाले, झरनों का, मनः शांत समुद्र पी लेता है ll