श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
हृदय की बात
सुन बात दूसरों की, कर ले भली प्रकार विचार lहृदय की बात पत्थर की लकीर, मनः कर तुरंत व्यवहार ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
बढ़ना है आगे
पिछला काम निपटा दे, फिर तू बढ़ आगे lगति बना तू कुछ ऐसी अपनी, मनः तन आलस छोड़ कर भागे ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
जीवन की सफलता
बातों में उनको न लगा, तू मुर्ख क्यों बनता है ?रह मग्न तू अपने कर्म में. मनः जीवन सफल बनता है l
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
लोकहित में
लोकहित की बात, कर्म कर, सुन और बोल lदिव्य शक्ति साथ तेरे, मनः फिर न तू डोल ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
स्वावलम्बन
छोटी-छोटी जरूरत पूरी करता चल, एक दिन स्वावलंबी हो जायेगा मेहनत करता चल तू, मनः धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जायेगा ll