श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
तीन शत्रु
आलस्य, झूठ, और अभिमान तीनों हैं तेरे शत्रु महान lएक को भी निकट न आने देना, मनः सुन ले तू देकर ध्यान ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
आशाओं का अँधेरा
आशाओं के घोर अँधेरे में, क्यों खो गया तेरा जीवन है ?तालाश खुद की खुद कर, मनः नाहक बना क्यों दीन-हीन है ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
विपदा
मुसीबत आ गई तो आने दे विपदा नहीं है कोई खास lनरमी-गर्मी का मौसम है, मनः तू हुआ है क्यों उदास ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
सम्मान भावना
लुटाया था अपना आप उसने तो तू उन्हें पूज रहा lक्यों पूजेगा, कौन तुझे ? मनः तू तो सबको लूट रहा ll
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श्रेणी: आत्मोवाच दोहावली
खुद को ढाल
सुहागा सत्य है, आग अहिंसा, सोना शरीर तपा ले lसांचे में खुद को ढाल, मनः मानव जीवन संवार ले l