जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: स्वरचित रचनाएँ

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    7. शिक्षा —–

    3 मई 2009 कश्मीर टाइम्सकार्य प्रयास करें जो सबका भला,सबके काम आएं जो विधि-विधान,संस्कारों का आचरण सदा यथार्थ हो,कार्य-व्यवहार करें जीवनोपयोगिता बयान,ज्ञान बढ़े और हो जिससे आत्मरक्षा,स्वास्थ्य वर्धन करे और रहे सामाजिक सुरक्षा,देगा कौन? हमें ऐसी शिक्षा,मिलेगी कहां? हमें ऐसी शिक्षा,

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    5. दिल प्रीतम का घर है

    19 अप्रैल 2009 दैनिक कश्मीर टाइम्समहात्मा गांधी जी का कथन है कि जिस तरह हमें अपना शरीर कायम रखने के लिए भोजन जरूरी है, आत्मा की भलाई के लिए प्रार्थना कहीं उससे भी ज्यादा जरूरी है। प्रार्थना या भजन जीभ से नहीं वरन हृदय से होता है। इसलिए गूंगे , तुतले और मूढ़ भी प्रार्थना कर…

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    6. मेहनत का राज

    12 अप्रेल 2009 कश्मीर टाइम्समेहनत करने वालों को काम बहुत हैं,नहीं करने वालों को बहुत हैं बहाने,बही कहें आँगन टेढा,जो कभी नाचना न जाने,मेहनत लगन से होती है,दिल-दिमाग एक करना जो जाने,मेहनत करने वालों को काम बहुत हैं,नहीं करने वालों को बहुत हैं बहाने,जबरन उनको काम पर न लगाना,ध्यान जिन्होंने काम पर नहीं लगाना,लगन से…

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    5. ललकार

    1 मार्च 2009 कश्मीर टाइम्सलक्ष्य जीतना है, एकाग्रता से,चाहे हमारा सर्वस्व लुट जाए,भिड़ना है हमने अज्ञान सेचाहे शीश हमारा कट जाए,संघर्ष जो है करता,उल्लास वो है पाता,आलस्य जो है करता,हर क्षण वो है पछताता,यह समय आलस्य करने का है नहीं,समय संघर्ष करने का है यही,अब हमने करने हैं शोषण,अत्याचार सहन नहीं,समय है लोहा लेने का…

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    4. स्वदेश के प्रति

    22 फरवरी 2009 कश्मीर टाइम्सन्याय प्रेमी, शांति के पुजारी प्यारे देश,हिम-किरीट स्वामी, जग से न्यारे देश,खड़ा अज्ञानी सीमा पर, कर रहा तन छारछार है,समझने पर टलता नहीं, कर रहा वार पर वार है,मार्ग दिखा कोई, राह पर लाना है उसेया मशाल लगा ध्वस्त करना है उसे?आदेश दे कोई, हम मिटाएँ तेरे घावों का क्लेश,न्याय प्रेमी,…

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