जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: विषयक आलेख

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    3. स्वाधीन भारत

    दैनिक जागरण 2 फरवरी 2006पराधीन देश में वो घड़ी लगती अच्छी थीस्थान स्थान पर तिरंगा फहराने कोलगाना जान की बाजी लगती अच्छी थीआज गीत वंदे मातरम गाने कोराष्ट्रीय गान का अपमान हो रहा क्योंहमारे स्वाधीन भारत मेंआतंकी संसद पर हमला हैं करतेहम आरपार की लड़ाई करने की हैं सोचा करतेउस पर हमला न करो वो…

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    16. क्या हमारा जीवन त्रुटिपूर्ण है ?

    17 नवम्बर 1996 कश्मीर टाइम्स मानव जीवन दर्शन  प्रगति करने वाला विवेकशील मनुष्य अपने जीवन को सदैव त्रुटिपूर्ण मानता है l वह उन त्रुटियों के होने की कभी चिंता नहीं करता है बल्कि उनको दूर करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है l आधुनिक काल में हर स्थान पर हड़तालें, बंद, घेराव, संप्रदायक दंगे, हिंसा…

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    11. राष्ट्र का नेतृत्व किनके हाथ है ?

    कश्मीर टाइम्स 19.9.1996जब कभी समुद्र की विशाल छाती को चीरते हुए अपनी मंजिल की ओर अग्रसित हो रहे किसी बड़े के तल में कोई अचानक छिद्र हो जाता है और उस बड़े के कर्मचारी जाने या अनजाने में उससे अनभिज्ञ रहते हैं या उसकी सुरक्षा हेतु समय रहते कोई उचित ठोस पग नहीं उठा पाते…

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    7. भारतीय शिक्षा की परंपरा

    आलेख – दैनिक कश्मीर टाइम्स 9.8.1996 जिस प्रकार निवार से किसी लकड़ी की चारपाई को कलात्मक ढंग से बुनकर तैयार किया जाता है ठीक उसी प्रकार किसी देश का मानचित्र उसके अनुकूल उपयोगी शिक्षा पर निर्भर करता है l इस काम में अभिभावक, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और प्रशासकों के आपसी प्रेम, सहयोग त्याग और बलिदान की…

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    6. लार्ड मैकाले और भारतीय शिक्षा

    कश्मीर टाइम्स 4.8.1996इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि भारतीय परंपरागत जन उपयोगी शिक्षा-प्रणाली ने विश्व की विशाल धरती पर मानव समाज, स्थानीय भाषा, विद्या, कला, ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति और साहित्य सृजन, पोषण और उसका विकास किया l उसके सामने आई समस्या व्यक्तिगत विकास की रही हो या समाजिक. आर्थिक हो या राजनैतिक, सभ्यता, कला–सांस्कृतिक हो…

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