श्रेणी: अपने आलेख
-
4. जंग अभी बाकी है
सितम्बर 2012 मातृवन्दना 15 अगस्त 1947 के दिन स्वदेशी राजनेताओं ने भारत की राजनैतिक सत्ता की बागडोर अपने हाथ ले ली। इसके साथ ही साथ कभी न डूबने वाले अंग्रेजी साम्राज्य का सूर्य, भारत में सदा के लिए अस्त हो गया। भारत से गोरे अंग्रेज चले गए, चेहरे बदल गए। शेष रह गया, अंग्रेजी प्रशासनिक ढांचा, व्यवस्था,…
-
3. दस्तक – संपूर्ण क्रांति की
सितम्बर 2012 मातृवन्दनाइसमें लेश मात्र भी संदेह नहीं है कि युगों-यगों से भारतीय सनातन गुरुकुल शिक्षा-प्रणाली ने विश्व की विशाल धरती पर समस्त मानव समाज, संस्कृत स्थानीय भाषा , विद्या-कला, ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति तथा वैदिक साहित्य – दर्शन , शास्त्र आदि का सृजन, पोषण , रक्षा और उसका विकास किया। समस्या व्यक्तित्व विकास की रही हो या आर्थिक, सामाजिक रही हो या…
-
2. सनातन जीवन में धन की उपयोगिता
मई 2012 मातृवन्दनाभारत ऋषि -मुनियों का देश है। भारतीय मनीषियों ने मानव जीवन को 100 वर्ष तक मुख्यतः चार आश्रमों में विभक्त किया था। उनमें प्रथम 25 वर्ष ब्रह्मचर्य, 25 से 50 वर्ष गृहस्थ, 50 से 75 वर्ष वानप्रस्थ और 75 से 100 वर्ष तक सन्यास आश्रम प्रमुख थे। उनके अपने विशेष सिद्धांत थे, उच्च आदर्श थे जिनके अनुसार मनुष्य अपना सार्थक एवं समर्थ जीवन…
-
1. सत्सनातन जीने की कला
मातृवंदना फरवरी 2012 किसी ने ठीक ही कहा है – “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत lपारब्रह्म को पाइए, मन ही के प्रतीत”अर्थात मन से हार मान लेने से मनुष्य की हार होना निश्चित परन्तु हारकर भी मन से न हारना और युक्ति-युक्त होकर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत…
-
1. मैकाले की सोच और भारतीय शिक्षा
आलेख – शिक्षा दर्पण ज्ञानवार्ता छमाही 2011 हिमाचल की मासिक पत्रिका “मातृवन्दना” अगस्त 2010 में पृष्ठ संख्या 19 पर प्रकाशित आलेख “मैकाले की सोच-1835 ई० में” के अनुसार यह एक वास्तविक लेख है l इसकी प्रति मद्रास हाईकोर्ट के अभिलेखों से प्राप्त हुई है l ब्रिटिश पार्लियामेंट के रिकार्ड में सुरक्षित है l लार्ड मैकाले…