जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: अपनी कवितायेँ

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    2. चिंगारी

    मई 2008 मातृवंदनारुकेंगे नहीं बिना किए निस्वार्थ कामनिश्चय है अपना करना है निस्वार्थ कामअरमान अपना कर सम्पन्न पांएगे लक्ष्य जो सामने खड़ा उत्पन्नकार्य बना है आज प्रतिदवंदी सामनेजय चाहता है प्रभुत्व अपनेरुकेंगे नहीं बिना किए निस्वार्थ कामनिश्चय है अपना करना है निस्वार्थ कामआगे बढ़ना है हमने साहस के बहानेेमात्र फूल शीश अर्पित करना हम हैं…

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    1. अभिलाषा

    फरवरी 2008 मातृवंदनासेवा करना धर्म हमारा, सेवा करते जाएंगे,दुःख-सुःख हैं हमारे साथी, हंस-हंस सहते जाएंगे,हम संघर्ष करने वाले, रहते नहीं कभी संकल्पहीन,बनाएंगे माँ तुझको हम जग में, अद्वितीय ओजस्विन,तेरा पुनः हो आकर्षण असीम प्रतीक,गए वापिस आएंगे, समझ निज प्यारा नीड़ मणिक,हम सब मिलकर गीत खुशी के गाएंगे,सेवा करना धर्म हमारा, सेवा करते जाएंगे,धरती माँ हमारी,…

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    3. प्रभा प्रभात

    29 फरवरी 2008 दैनिक जागरणपशु धन से हो श्रृंगार घरघर कापौष्टिकता से लहलहाएं सब खेत देश केदूध दही घी से बलवान बने हर बच्चा घरघर कातेजस्वी कहलाएं नौजवान देश केघरघर पहुंचे फिर ऐसी शिक्षामांगे न कोई किसी से भिक्षाहर हाथ रोजगाार दिलाए शिक्षाबयार तो कोई लाल लाए शिक्षाखुद समझे जो औरों को समझाएसत्यअसत्य में भेद…

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    2. हम वही हैं जो

    19 फरवरी 2008 दैनिक जागरणजो थे पहले हम कभी हैं आजऔर रहेंगे कल भीहमनें फिर दुनियां का संशय मिटाना हैलौह पुरुष बन दिखाना हैगर भारत की ओर कोई अंगुली उठेउसे तुरन्त काट गिराना हैहमनें फिर दुनियां का संशय मिटाना हैजो थे पहले हम कभी हैं आजऔर रहेंगे कल भीकर्मशील रह कर हम निर्धनता मिटाने वालेसंस्कारवान…

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    1. फौलादी सीना

    दैनिक जागरण 1 जनवरी 2008 श श श सावधान सावधानआ गया तूफान तूफान तूफानश श श सावधान सावधानसमुद्री तूफान थम जाते हैंकिनारा ठोस रामसेतु होने दोआंधी तूफान दिशा बदल लेते हैंहर कदम अडिग हिमालय सा होने दोतूफान जिन्दगी धराशायी हो जाते हैंनेक इरादे इन्सान के होने दो

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