श्रेणी: सामाजिक वर्ण-व्यवस्था
-
श्रेणी: शूद्र-कर्मवीर
शूद्र-कर्मवीर
– # शूद्र वह कलाकार है जो अपनी हस्त कला से मिट्टी, पत्थर, लकड़ी को भी साक्षात चित्र/मूर्ती, वस्तु, भवन, सेतु में बदल सकता है।*- # जो व्यक्ति सत्य, धर्म, न्याय और नीति के हित में अपनी कला – विद्या का सृजन, पोषण, वर्धन करता है, शूद्र कहलाता है।*- # शूद्र वर्ण संपूर्ण मानव समाज…
-
व्यवस्था
# जिस व्यवस्था में असत्य, अधर्म, अन्याय और अनीति का बोलबाला हो उसे बदल देने में ही जन, समाज और राष्ट्र का हित है।*
-
श्रेणी: वैश्य – धर्मवीर
वैश्य – धर्मवीर
– # वैश्य वर्ण मानव समाज में आर्थिक सुख – समृद्धि लाता है ।*- # जो व्यक्ति सत्य, धर्म, न्याय और नीति के हित में अपनी कमाई का कुछ अंश दान करता है, वैश्य कहलाता है ।*- # वैश्य वह कलाकार है जो अपनी कला से मिट्टी को भी सोने में बदल सकता है ।*
-
श्रेणी: सामाजिक वर्ण-व्यवस्था
वर्ण की उत्पत्ति
# बालक का जन्म परिवार में होता है लेकिन किसी वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र की उत्पत्ति उसके गुण संस्कार और स्वभावानुसार गुरुकुल में ही होती है।*
-
श्रेणी: सामाजिक वर्ण-व्यवस्था
वर्ण व्यवस्था का आधार
# वर्ण व्यवस्था गुण, संस्कार, स्वभाव आधारित है न कि जन्म आधारित।*