श्रेणी: शिक्षा दर्पण
-
6. विद्यार्थी जीवन आदर्श
25 सितम्बर 2007 दैनिक जागरणअगर कोई स्थानीय व्यक्ति अच्छा खाता-पीता, सोता है और उसके बारे में लोग कहें कि उसका जीवन सर्वश्रेष्ठ है तो एक विद्यार्थी भी उनकी हां में हां मिलाए क्या? नहीं, वह जानता है कि सुखी जीना मात्र खाने-पीने, सोने तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह जीवन की एक कला है।…
-
4. “विद्यार्थी जीवन कल्याण मंच”
दैनिक जागरण 2.9.2007 प्राचीन काल की तरह माता-पिता व गुरुजनों को आज मात्र स्वयं ही को नहीं जगाना है बल्कि स्वयं जागकर बाल, विद्यार्थी, स्नातक और युवा वर्ग को भी जगाना है l वे अब भी स्वयं और परहित के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं l उनमें लौकिक एवं अलौकिक कार्य कर सकने की…
-
7. भारतीय शिक्षा की परंपरा
आलेख – दैनिक कश्मीर टाइम्स 9.8.1996 जिस प्रकार निवार से किसी लकड़ी की चारपाई को कलात्मक ढंग से बुनकर तैयार किया जाता है ठीक उसी प्रकार किसी देश का मानचित्र उसके अनुकूल उपयोगी शिक्षा पर निर्भर करता है l इस काम में अभिभावक, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और प्रशासकों के आपसी प्रेम, सहयोग त्याग और बलिदान की…
-
6. लार्ड मैकाले और भारतीय शिक्षा
कश्मीर टाइम्स 4.8.1996इसमें तनिक भी संदेह नहीं है कि भारतीय परंपरागत जन उपयोगी शिक्षा-प्रणाली ने विश्व की विशाल धरती पर मानव समाज, स्थानीय भाषा, विद्या, कला, ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति और साहित्य सृजन, पोषण और उसका विकास किया l उसके सामने आई समस्या व्यक्तिगत विकास की रही हो या समाजिक. आर्थिक हो या राजनैतिक, सभ्यता, कला–सांस्कृतिक हो…
-
5. विदेशी शिक्षा से हमे क्या मिला ?
कश्मीर टाइम्स 26 जुलाई 1996 भारत पराधीन हो गया l कारण था – उस समय के महत्वाकांक्षी, अहंकारी राजनीतिज्ञों का अपने गर्व में चूर रहकर छोटी-छोटी बातों के लिए मात्र अपने हित में बदले की भावना से एक दूसरे को नीचा दिखाने हेतु आपस में लड़ते रहना l स्थान-स्थान पर आचार्यों तथा विद्वानों का अपमान…