जिज्ञासा-ज्ञान-जाग्रति

सत्सनातन शिव – शक्ति परिवार



श्रेणी: दैनिक जागरण हिमाचल

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    14. ईर्ष्या – घृणा

    दैनिक जागरण 9 मई 2007आग से खेल रहा क्यों?वह राख बनाया करती हैईर्ष्या से भी प्रेम कर रहाहंसते को रुलाया करती हैघृणा कर नीच विचारों सेमगर इन्सान से नहींकरके ईर्ष्या घृणा इन्सान सेरह सकता तू सुख शांति से नहीं

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    13. कोटि – कोटि प्रणाम

    दैनिक जागरण 3 मई 2007मातृ भूमि तुझकोकरूं मैं क्या अर्पणसाहस नहीं मुझमेंबिन देरी करूं मैं आत्म समर्पणबस कार्य के सिवायफल की ओर न हो मेरा ध्यानसेवा की हो डगर अपनीऔर नित हो तुझे कोटि कोटि मेरा प्रणाम

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    12. स्नान गृह में

    दैनिक जागरण 29 अप्रैल 2007 दाढ़ी बना ले चाहे तू दांत साफ कर लेपर भाई चल पहले नल बंद कर देभूजल अनावश्यक बाहर आ रहाभूजल स्तर नीचे जा रहाअब फव्वारे से या टब में नहीं है नहानाबाल्टी भर पानी से ठीक है नहानाजब बाल्टी भर पानी से नहाया जा सकेदो बाल्टी भर पानी बहाना है…

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    11. समय का स्वभाव

    दैनिक जागरण 24 अप्रैल 2007समय तो बहता जल हैवह बहता जाता गाता हैतू संभाल पलपल की करता चलजीवन पलपल से बन पाता हैगोली छूटती है बन्दूक सेफिर कभी नहीं आती है हाथसकल दिवस जाता पलपल मेंघड़ी भी नहीं देती है साथ

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    10. आलस्य

    दैनिक जागरण 18 अप्रैल 2007 प्राप्त वस्तु से संतुष्ट हुआतूने मेहनत करना छोड़ा क्योंकोई वस्तु रहेगी कब तक पास तेरेकर्म से तूने नाता तोड़ा क्योंआलस्य में क्यों बैठ गयातू अपने हाथपांव पसारमिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिला देदेख मेहनत का भी चमत्कारआलसी नहीं आलस्य भगा देतू अगल बगल से दूरघोड़ा तन है तेराचाबुक मेहनत मार…

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